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बिना पंजीकरण चल रहे निजी बोरवेल

Fri, 06 Apr 2018 08:19 PM IST
Updated Fri, 06 Apr 2018 08:19 PM IST
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बिना पंजीकरण चल रहे निजी बोरवेल

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बिना पंजीकरण चल रहे निजी बोरवेल
कालाअंब क्षेत्र में चांदी कूट रहे बोरवेल संचालक
भूमिगत जल को धड़ल्ले से दोहन, विभाग बेखबर
अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब और इससे सटे कई इलाकों में निजी बोरवेल लगाकर भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है। दर्जनों बोरवेल लगाकर भूमिगत जल का व्यवसायीकरण हो रहा है। गर्मियों में पानी बेच कर लोग चांदी कूट रहे हैं लेकिन रोकने वाला कोई नहीं। निजी बोरवेल लगाने के लिए एचपी ग्राउंड वाटर (रेगुलेशन एंड कंट्रोल ऑफ डेवलेपमेेंट एंड मैनेजमेंट) अधिनियम 2005 की धारा 7 और 8 के तहत बोर का पंजीकरण व अनुमति पत्र लिया जाना आवश्यक है लेकिन औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब, रामपुर जट्टान, मोगीनंद व अन्य क्षेत्रों में निजी बोरवेल बिना पंजीकरण व अनुमति पत्र के जल दोहन कर रहे हैं। यहां तक कि इस पानी को बेचा भी जा रहा है।
करीब दो साल पहले आईपीएच ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशानुसार नाहन और कालाअंब क्षेत्र के 43 निजी बोरवेल संचालकों को नोटिस जारी करके निर्देश दिए थे कि एचपी ग्राउंड वाटर अथॉरिटी शिमला को बोरवेलों के पंजीकरण व अनुमति पत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया करें। इसके बाद मात्र 23 बोरवेल संचालकों ने ही आवेदन किया लेकिन यह भी अभी प्रक्रिया में ही हैं।
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इसके अलावा कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र से वर्ष 2010 से 2014 तक 11 उद्योगों व एक घरेलू बोर संचालक ने पंजीकरण करवाया है। वर्तमान में अभी भी लगभग आधा दर्जन ऐसे बोरवेल हैं, जिन्होंने पंजीकरण के लिए आवेदन तक नहीं किया।
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इस संदर्भ में ग्राउंड वाटर अथॉरिटी शिमला के सदस्य सचिव दिनेश कुमार नेगी ने बताया कि ग्राउंड वाटर अधिनियम 2005 के सेक्शन 7 और 8 के तहत निजी बोरवेलों का पंजीकरण व अनुमति लेना अनिवार्य है। कितने बोरवेलों का पंजीकरण हुआ है और कितने बिना पंजीकरण के हैं उनकी रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के आईपीएच विभाग को भेजनी होती है। उसके बाद आगामी कार्रवाई की जाती है।

उधर, आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता आशीष राणा ने बताया कि जिन बोरवेल संचालकों ने पंजीकरण नहीं करवाया है, उनको चिन्हित करके दोबारा नोटिस दिए जाएंगे। जिन्होंने पंजीकरण करवाया है उनकी भी जांच की जाएगी। वह किस उद्देश्य से इसका प्रयोग कर रहे हैं।
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----------------भारद्वाज
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