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लाना पालर को घोषित किया जाए बांध प्रभावित क्षेत्र
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:14 PM IST
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लाना पालर को घोषित किया जाए बांध प्रभावित क्षेत्र
एक समान भौगोलिक स्थितियां, फिर भी किया दरकिनार
क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
उपमंडल संगड़ाह के अंतर्गत आने वाले लानापालर गांव के ग्रामीणों ने लानापालर क्षेत्र को रेणुका बांध प्रभावित क्षेत्र में शामिल करने की मांग उठाई है। अपनी इस मांग को लेकर क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने एक पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में स्थानीय ग्रामीण पुष्पा देवी, लीला देवी, रेखा देवी, यशपाल, अशोक, सत्या देवी, अभिमन्यु, हरीचंद, इंद्र ठाकुर, काजल, इंद्र सिंह, वंदना, निर्मला देवी, तरसेम सिंह, रामस्वरूप, यशवंत सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि संगड़ाह की गिरि नदी के साथ लगते सभी गांवों को रेणुका बांध प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया जा चुका है लेकिन गिरि नदी से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित लानापालर को प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित रेणुका बांध के निर्माण से पालर क्षेत्र को भी काफी नुकसान पहुंचेगा लेकिन बांध प्रबंधन की ओर से क्षेत्र को प्रभावित जोन में नहीं डाला है। हैरत की बात यह है कि गिरि नदी को खैरी तक बांध प्रभावित क्षेत्र में घोषित किया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि सियूं क्षेत्र के साथ लगता लानापालर भी गिरि नदी की जद में है। यहां पहाड़ियों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। रेणुका बांध बनने से नदी के साथ लगती पालर गांव की पहाड़ियां भी इसकी जद में आएगी। इससे भूस्खलन व आपदा की संभावनाएं लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों ने कहा कि लानापालर क्षेत्र को बांध प्रभावित क्षेत्र घोषित करने के लिए बांध प्रबंधन व जिला प्रशासन को भी कई बार लिखा जा चुका है लेकिन इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। न ही बांध प्रबंधन ने इस बारे सर्वेक्षण करवाया है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्र के माध्यम से मांग की कि उनके गृह क्षेत्र लानापालर पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए उसे जल्द से जल्द बांध प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके।
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--पंकज तन्हा
एक समान भौगोलिक स्थितियां, फिर भी किया दरकिनार
क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
उपमंडल संगड़ाह के अंतर्गत आने वाले लानापालर गांव के ग्रामीणों ने लानापालर क्षेत्र को रेणुका बांध प्रभावित क्षेत्र में शामिल करने की मांग उठाई है। अपनी इस मांग को लेकर क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने एक पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में स्थानीय ग्रामीण पुष्पा देवी, लीला देवी, रेखा देवी, यशपाल, अशोक, सत्या देवी, अभिमन्यु, हरीचंद, इंद्र ठाकुर, काजल, इंद्र सिंह, वंदना, निर्मला देवी, तरसेम सिंह, रामस्वरूप, यशवंत सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि संगड़ाह की गिरि नदी के साथ लगते सभी गांवों को रेणुका बांध प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया जा चुका है लेकिन गिरि नदी से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित लानापालर को प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित रेणुका बांध के निर्माण से पालर क्षेत्र को भी काफी नुकसान पहुंचेगा लेकिन बांध प्रबंधन की ओर से क्षेत्र को प्रभावित जोन में नहीं डाला है। हैरत की बात यह है कि गिरि नदी को खैरी तक बांध प्रभावित क्षेत्र में घोषित किया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि सियूं क्षेत्र के साथ लगता लानापालर भी गिरि नदी की जद में है। यहां पहाड़ियों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। रेणुका बांध बनने से नदी के साथ लगती पालर गांव की पहाड़ियां भी इसकी जद में आएगी। इससे भूस्खलन व आपदा की संभावनाएं लगातार बनी हुई है।
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ग्रामीणों ने कहा कि लानापालर क्षेत्र को बांध प्रभावित क्षेत्र घोषित करने के लिए बांध प्रबंधन व जिला प्रशासन को भी कई बार लिखा जा चुका है लेकिन इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। न ही बांध प्रबंधन ने इस बारे सर्वेक्षण करवाया है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्र के माध्यम से मांग की कि उनके गृह क्षेत्र लानापालर पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए उसे जल्द से जल्द बांध प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके।
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--पंकज तन्हा