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पढ़ाई के लिए 15 किलोमीटर लंबी कदमताल

Thu, 28 Mar 2019 09:51 PM IST
rajeshwar gautam rajeshwar gautam
Updated Thu, 28 Mar 2019 09:51 PM IST
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पढ़ाई के लिए 15 किलोमीटर लंबी कदमताल
अमर उजाला ब्यूरो
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सतौन (सिरमौर)। उच्च शिक्षा ग्रहण करना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है शिक्षा के मंदिर पहुंचना। दर्जनों स्कूली और कॉलेज के छात्र इन दिनों 15 किलोमीटर की कदमताल करने के बाद उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंच रहे हैं। कई बार तो छात्र निर्धारित समय पर कॉलेज पहुंच भी नहीं पाते हैं। लिहाजा, कई बार क्लास भी छूट रही है। यह हाल है कफोटा स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का। हर रोज छात्र-छात्राएं कई किलोमीटरों का सफर तय कर पढ़ाई के लिए कॉलेज पहुंच रहे हैं। ऐसे में छात्र परेशान हैं तो अभिभावक चिंतित। गिरिपार क्षेत्र के मस्तभोज की चार पंचायतों के स्कूली और कॉलेज के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए 15 किमी का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। कॉलेज की परीक्षाएं सिर पर हैं। कॉलेज में कक्षाएं लगाने के लिए घर से दो तीन घंटे पहले चलना पड़ रहा है। हालांकि, कफोटा-जाखना सड़क पर एक निजी बस चलती थी, लेकिन वह भी बंद पड़ी है। छात्रों समेत क्षेत्रवासी सरकार के नुमाइंदों से परिवहन की बस चलाने के लिए भी कई बार गुजारिश कर चुके हैं लेकिन सुविधा आज तक नहीं मिल पाई है।

पांच किमी जंगल के रास्ते से गुजरतीं हैं लड़कियां
ग्रामीण कुंदन सिंह शास्त्री, कमल, सतपाल, ओमप्रकाश, ग्यारूराम, बृजभूषण, सुरेंद्र, मायाराम चौहान आदि ने बताया कि मस्तभोज क्षेत्र की तीन-चार पंचायतों जामना, शरली, कांडों चयोग और शावगा पंचायत के तीन दर्जन के करीब स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों को करीब 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि इन पंचायतों के लिए स्कूल और कॉलेज के समय पर एक निजी बस थी, लेकिन वह भी नियमित रूप से नहीं चल रही है। कॉलेज छात्रा नीतू, मनीषा, लता, अनीता, सरोज आदि ने कहा कि उन्हें सुबह कॉलेज के लिए हर रोज मजबूरन पैदल चलना पड़ रहा है, जिसका जिम्मेदार प्रशासन है। ज्यादा समस्या लड़कियों के लिए बनी हुई है। स्कूल और कॉलेज जाने के लिए चार से पांच किलोमीटर जंगल का रास्ता भी पार करना चुनौती भरा है। पंचायत में सुबह एक बस है, वह सात बजे निकल जाती है, जिसके चलते उन्हें पैदल ही रास्ता तय करना पड़ रहा है। रास्ते में आवाजाही का कोई भी साधन नहीं मिलता। कुछ बच्चों को 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उधर, आरटीओ सुनील शर्मा ने बताया कि यदि निजी बस सेवा बंद की गई है तो संबंधित बस मालिक को नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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