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प्री-नर्सरी स्कूलों के फैसले के खिलाफ रोजाना होंगे प्रदर्शन
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:34 PM IST
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प्री-नर्सरी स्कूलों के फैसले के खिलाफ रोजाना होंगे प्रदर्शन
लंबित मांगों पर आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन चार दिन करेगी आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
सीटू की राज्य कमेटी के आह्वान पर आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन 22 से 27 अक्तूबर तक जिला मुख्यालय नाहन में धरना प्रदर्शन करेगी। यूनियन अपनी लंबित मांगों और सरकार के प्री-नर्सरी के फैसले के खिलाफ यह प्रदर्शन किए जाएंगे। यूनियन की जिला महासचिव बीना शर्मा ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि चार दिन तक रोजाना यह प्रदर्शन किए जाएंगे। कहा कि आईसीडीएस को जिस मुख्य उद्देश्य के साथ देश में 1975 में शुरू किया गया था, आज सरकार इस परियोजना को बदलने का जनविरोधी कार्य करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने नर्सरी स्कूलों को आंगनबाड़ी केंद्रों में न खोलकर सरकारी स्कूलों में खोलने का जो फैसला लिया है वह गलत है। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं नर्सरी स्कूलों को चलाने में सक्षम हैं। करीब चार दशकों से अधिक समय से इस परियोजना को जमीन तक पहुंचाने व सही तरीके से लागू करने के लिए लाखों महिलाओं की अथक सेवाएं इसमें रही हैं। लेकिन, सरकार इसे बदलने की कोशिश में है, जो कि हैरान करने वाला निर्णय है। यूनियन इस प्रदर्शन और संघर्ष के माध्यम से मांग करेगी कि नर्सरी स्कूलों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाया जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सेवाओं को सरकार नियमित करें। आईसीडीएस के बजट में बढ़ोतरी की जाए। परियोजना में कार्यरत कर्मियों को 12 हजार व सात हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उक्त प्रदर्शन के बावजूद भी सही निर्णय नहीं लेती तो भविष्य में अनिश्चितकालीन संघर्ष किया जाएगा।
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लंबित मांगों पर आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन चार दिन करेगी आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
सीटू की राज्य कमेटी के आह्वान पर आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन 22 से 27 अक्तूबर तक जिला मुख्यालय नाहन में धरना प्रदर्शन करेगी। यूनियन अपनी लंबित मांगों और सरकार के प्री-नर्सरी के फैसले के खिलाफ यह प्रदर्शन किए जाएंगे। यूनियन की जिला महासचिव बीना शर्मा ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि चार दिन तक रोजाना यह प्रदर्शन किए जाएंगे। कहा कि आईसीडीएस को जिस मुख्य उद्देश्य के साथ देश में 1975 में शुरू किया गया था, आज सरकार इस परियोजना को बदलने का जनविरोधी कार्य करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने नर्सरी स्कूलों को आंगनबाड़ी केंद्रों में न खोलकर सरकारी स्कूलों में खोलने का जो फैसला लिया है वह गलत है। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं नर्सरी स्कूलों को चलाने में सक्षम हैं। करीब चार दशकों से अधिक समय से इस परियोजना को जमीन तक पहुंचाने व सही तरीके से लागू करने के लिए लाखों महिलाओं की अथक सेवाएं इसमें रही हैं। लेकिन, सरकार इसे बदलने की कोशिश में है, जो कि हैरान करने वाला निर्णय है। यूनियन इस प्रदर्शन और संघर्ष के माध्यम से मांग करेगी कि नर्सरी स्कूलों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाया जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सेवाओं को सरकार नियमित करें। आईसीडीएस के बजट में बढ़ोतरी की जाए। परियोजना में कार्यरत कर्मियों को 12 हजार व सात हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उक्त प्रदर्शन के बावजूद भी सही निर्णय नहीं लेती तो भविष्य में अनिश्चितकालीन संघर्ष किया जाएगा।