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ददाहू अस्पताल में अव्यवस्था, भर्ती नहीं किए जा रहे रोगी
Updated Mon, 25 Jun 2018 10:41 PM IST
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योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। सिविल अस्पताल ददाहू में व्यवस्था सुधरने की बजाए बिगड़ती जा रही है। नर्सों के अभाव में यहां मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। केवल गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी ही की जा रही है। हालत इस कदर खराब हैं कि गंभीर रोग से पीड़ित रोगियों को भर्ती करने की बजाए उन्हें रेफर किया जा रहा है। वार्ड सिस्टर सहित कुल पांच नर्सों में से यहां चार पद रिक्त पड़े हुए हैं। जबकि प्रतिनियुक्ति पर भेजी गई नर्सें भी यहां अपनी सेवाएं देने नहीं पहुंच रही हैं।
अस्पताल की पूरी व्यवस्था मात्र एक वार्ड सिस्टर के कंधों पर हैं। जबकि दो नर्सों का तबादला हो जाने के बाद उनके स्थान पर दूसरी नर्सों को यहां नहीं भेजा गया है। जबकि दो नर्सें मातृत्व अवकाश पर हैं। यहां नर्सों की कमी रोगियों पर निरंतर भारी पड़ रही है जिस कारण यहां रोगियों को भर्ती ही नहीं किया जा रहा है। 50 बिस्तरों वाले इस सिविल अस्पताल में सोमवार शाम तक मात्र तीन रोगी ही भर्ती पाए गए। गंभीर रूप से बीमार रोगियों को सुबह और शाम टीका लगवाने के लिए ही बुलाया जा रहा है। ऐसे में गंभीर रोगियों की हालत सुधरने की बजाए बिगड़ती जा रही है। उन्हें बीमारी की हालत में भी दो-दो समय अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
यहां नर्सों का न आना रोगियों की जान पर बन रहा है। सिविल अस्पताल ददाहू के तीनों वार्ड रोगियों से खचाखच भरे रहा करते थे लेकिन सोमवार को वार्डों में केवल खाली बिस्तर ही दिखाई दिए। अस्पताल में डायरिया के दो व एक नवजात जच्चा-बच्चा ही भर्ती था। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में सेवाएं ले पाना रोगियों की जान पर भी भारी पड़ सकता है। इकलौती वार्ड सिस्टर कितने समय अपनी सेवाएं दे सकती हैं। ऐसे में व्यवस्थाएं बनाए रख पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
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उधर, सिविल अस्पताल ददाहू की प्रभारी डॉ. मोनिशा कश्यप ने बताया कि स्टाफ नर्सों के अभाव में रोगियों को वार्डों में भर्ती नहीं किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति पर भेजी गई नर्सें भी अपनी सेवाएं देने नहीं पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यहां केवल महिलाओं की प्रसव ही करवाया जा रहा है।
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ददाहू (सिरमौर)। सिविल अस्पताल ददाहू में व्यवस्था सुधरने की बजाए बिगड़ती जा रही है। नर्सों के अभाव में यहां मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। केवल गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी ही की जा रही है। हालत इस कदर खराब हैं कि गंभीर रोग से पीड़ित रोगियों को भर्ती करने की बजाए उन्हें रेफर किया जा रहा है। वार्ड सिस्टर सहित कुल पांच नर्सों में से यहां चार पद रिक्त पड़े हुए हैं। जबकि प्रतिनियुक्ति पर भेजी गई नर्सें भी यहां अपनी सेवाएं देने नहीं पहुंच रही हैं।
अस्पताल की पूरी व्यवस्था मात्र एक वार्ड सिस्टर के कंधों पर हैं। जबकि दो नर्सों का तबादला हो जाने के बाद उनके स्थान पर दूसरी नर्सों को यहां नहीं भेजा गया है। जबकि दो नर्सें मातृत्व अवकाश पर हैं। यहां नर्सों की कमी रोगियों पर निरंतर भारी पड़ रही है जिस कारण यहां रोगियों को भर्ती ही नहीं किया जा रहा है। 50 बिस्तरों वाले इस सिविल अस्पताल में सोमवार शाम तक मात्र तीन रोगी ही भर्ती पाए गए। गंभीर रूप से बीमार रोगियों को सुबह और शाम टीका लगवाने के लिए ही बुलाया जा रहा है। ऐसे में गंभीर रोगियों की हालत सुधरने की बजाए बिगड़ती जा रही है। उन्हें बीमारी की हालत में भी दो-दो समय अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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यहां नर्सों का न आना रोगियों की जान पर बन रहा है। सिविल अस्पताल ददाहू के तीनों वार्ड रोगियों से खचाखच भरे रहा करते थे लेकिन सोमवार को वार्डों में केवल खाली बिस्तर ही दिखाई दिए। अस्पताल में डायरिया के दो व एक नवजात जच्चा-बच्चा ही भर्ती था। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में सेवाएं ले पाना रोगियों की जान पर भी भारी पड़ सकता है। इकलौती वार्ड सिस्टर कितने समय अपनी सेवाएं दे सकती हैं। ऐसे में व्यवस्थाएं बनाए रख पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
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उधर, सिविल अस्पताल ददाहू की प्रभारी डॉ. मोनिशा कश्यप ने बताया कि स्टाफ नर्सों के अभाव में रोगियों को वार्डों में भर्ती नहीं किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति पर भेजी गई नर्सें भी अपनी सेवाएं देने नहीं पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यहां केवल महिलाओं की प्रसव ही करवाया जा रहा है।