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दो बार हुई घोषणा, नहीं बना ददाहू बस अड्डा
Updated Tue, 24 Oct 2017 07:38 PM IST
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मुद्दा---फोटो 17 और 18
दो बार हुई घोषणा, नहीं बना ददाहू बस अड्डा
विधानसभा चुनाव में गूंजा बस स्टैंड का मुद्दा
चार बसें ही खड़ी हो सकती हैं ददाहू बस अड्डे पर
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। ददाहू बस अड्डे की दो-दो बार घोषणा करने पर भी हालात जस के तस बने हुए हैं। ददाहू बाजार में बसें खड़ी करने के लिए जगह नहीं है। छोटे से बस अड्डे में महज चार बसें खड़ी की जा सकती है। जबकि दर्जनों रूटों पर चलने वाली बसें यहां पहुंचती है। इस वजह से बसें सड़क किनारे खड़ी की जा रही हैं जिससे यहां अक्सर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। विधानसभा चुनाव में अब फिर बस स्टैंड का मुद्दा गरमाने लगा है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों की सरकारें ददाहू में बस अड्डे का निर्माण करवाने में असफल साबित हुई हैं। स्वयं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भाजपा शासनकाल के दौरान तत्कालीन परिवहन मंत्री महेंद्र सिंह ने ददाहू बस अड्डा के निर्माण की घोषणा की है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए पाए।
हैरत यह है कि जमीन के लिए भूमि का प्रबंधन भी नहंीं किया गया। बस अड्डे नहीं होने के कारण यहां पर ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। जर्जर अवस्था के पुराने बस अड्डे का भवन भी गिरने के कगार पर पहुंच गया है। हर रोज यहां पर लगभग 60 रूटों की बसें पहुंचती हैं। यह बस अड्डा रेणुका विधानसभा की 30 पंचायतों को परिवहन सुविधा मुहैया करवा रहा है। बस अड्डा के लिए उपयुक्त भूमि का चयन तक प्रशासन नहीं कर पा रहा है। बस अड्डा को लेकर वर्ष 2012 में परिवहन मंत्री महेंद्र सिंह ने घोषणा की थी। उन्होंने 25 लाख रुपये की टोकन मनी भी स्वीकृत की थी। जबकि इसके बाद 2013 में मुख्यमंत्री ने फिर इसका ऐलान किया लेकिन उनकी घोषणा भी परवान नहीं चढ़ पाई।
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बॉक्स के लिए---
क्या कहते हैं नेता
पूर्व विधायक हृदय राम का कहना है कि वर्ष 2012 में जब वह विधायक थे तो परिवहन मंत्री से इसकी घोषणा करवाई थी। इसके बाद आचार संहिता लग गई लेकिन पांच वर्ष तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाए।
विधायक विनय कुमार का कहना है कि बस अड्डा निर्माण को लेकर प्रशासन ने दो-तीन जगह देखी है। इसका प्रपोजल भेजा गया है। अब बस अड्डा निर्माण प्राधिकरण की स्वीकृति ही शेष रह गई है। भूमि का चयन नहीं होने की वजह से काम में विलंब हुआ है।
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-----योगेंद्र अग्रवाल
दो बार हुई घोषणा, नहीं बना ददाहू बस अड्डा
विधानसभा चुनाव में गूंजा बस स्टैंड का मुद्दा
चार बसें ही खड़ी हो सकती हैं ददाहू बस अड्डे पर
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। ददाहू बस अड्डे की दो-दो बार घोषणा करने पर भी हालात जस के तस बने हुए हैं। ददाहू बाजार में बसें खड़ी करने के लिए जगह नहीं है। छोटे से बस अड्डे में महज चार बसें खड़ी की जा सकती है। जबकि दर्जनों रूटों पर चलने वाली बसें यहां पहुंचती है। इस वजह से बसें सड़क किनारे खड़ी की जा रही हैं जिससे यहां अक्सर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। विधानसभा चुनाव में अब फिर बस स्टैंड का मुद्दा गरमाने लगा है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों की सरकारें ददाहू में बस अड्डे का निर्माण करवाने में असफल साबित हुई हैं। स्वयं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भाजपा शासनकाल के दौरान तत्कालीन परिवहन मंत्री महेंद्र सिंह ने ददाहू बस अड्डा के निर्माण की घोषणा की है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए पाए।
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हैरत यह है कि जमीन के लिए भूमि का प्रबंधन भी नहंीं किया गया। बस अड्डे नहीं होने के कारण यहां पर ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। जर्जर अवस्था के पुराने बस अड्डे का भवन भी गिरने के कगार पर पहुंच गया है। हर रोज यहां पर लगभग 60 रूटों की बसें पहुंचती हैं। यह बस अड्डा रेणुका विधानसभा की 30 पंचायतों को परिवहन सुविधा मुहैया करवा रहा है। बस अड्डा के लिए उपयुक्त भूमि का चयन तक प्रशासन नहीं कर पा रहा है। बस अड्डा को लेकर वर्ष 2012 में परिवहन मंत्री महेंद्र सिंह ने घोषणा की थी। उन्होंने 25 लाख रुपये की टोकन मनी भी स्वीकृत की थी। जबकि इसके बाद 2013 में मुख्यमंत्री ने फिर इसका ऐलान किया लेकिन उनकी घोषणा भी परवान नहीं चढ़ पाई।
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क्या कहते हैं नेता
पूर्व विधायक हृदय राम का कहना है कि वर्ष 2012 में जब वह विधायक थे तो परिवहन मंत्री से इसकी घोषणा करवाई थी। इसके बाद आचार संहिता लग गई लेकिन पांच वर्ष तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाए।
विधायक विनय कुमार का कहना है कि बस अड्डा निर्माण को लेकर प्रशासन ने दो-तीन जगह देखी है। इसका प्रपोजल भेजा गया है। अब बस अड्डा निर्माण प्राधिकरण की स्वीकृति ही शेष रह गई है। भूमि का चयन नहीं होने की वजह से काम में विलंब हुआ है।
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-----योगेंद्र अग्रवाल