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जुर्म को सहना भी गुनाह करने के बराबर, उठाएं आवाज

Wed, 15 May 2019 10:14 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 15 May 2019 10:14 PM IST
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जुर्म को सहना भी गुनाह करने के बराबर, उठाएं आवाज
कालाअंब (सिरमौर)। जीवन में कामयाबी हासिल करनी है तो अपनी संगत बदलनी होगी। संगत बदलेंगे तो सोच बदलेगी। सोच बदली तो नजरिया बदलेगा और नजरिया बदला तो जिंदगी का नजारा ही बदल जाएगा। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल मुहिम के तहत होली हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल नाहन में आयोजित कार्यक्रम में डीएसपी मुख्यालय परम देव ठाकुर ने छात्राओं को यह अहम जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए सपनों की अहमियत है। कुछ कर गुजरने का सपना देख उसे पूरा करने के लिए मेहनत करें। ज्ञान अर्जित कर सपने साकार किए जा सकते हैं। डीएसपी ने कहा कि जुर्म को सहना भी जुर्म करने के बराबर गुनाह है। लिहाजा, जुर्म को छुपाएं नहीं। अपराध बढ़ने का एक कारण यह भी है कि समाज में हम जुर्म को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। समाज के सहयोग के बिना पुलिस और कानून भी इस पर नकेल नहीं कर सकता। मुजरिम को सजा दिलाने में समाज के हर वर्ग का योगदान जरूरी है। महिला के प्रति होने वाले अधिकतर अपराध लोकलाज के चलते अनदेखे किए जाते हैं। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जमाने के साथ बदलना होगा। महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यदि कोई अपराधिक प्रवृति का व्यक्ति तंग करता है तो उसे छुपाएं नहीं। या तो उसका जवाब दें या फिर पुलिस को जानकारी दें। पुलिस थाना में आने से लोग संकोच करते हैं, ऐसा न करें। उन्होंने कहा कि नशे से दूर रहें। यदि कोई नशा करता है तो उसे इससे बाहर निकालने के लिए प्रयास करें। इसमें पुलिस भी सहायता करेगी। इस अवसर पर छात्राओं को आपातकाल में पुलिस के 100 नंबर, गुड़िया हेल्पलाइन 1515 और शक्ति ऐप बटन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से भी आग्रह किया कि छात्राओं थाना में लाकर पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दें। इस अवसर पर स्कूल की निदेशक आयतन गिल, महिला पुलिस कर्मी बबीता और लक्ष्मी के अलावा पूनम, शुबरा, पारूल, आशू, मनीषा और अंजना उपस्थित रहीं।
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होली हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य सतिंद्र गिल ने कहा कि महिला सशक्तीकरण तभी संभव है, जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। बेटियां आर्थिक तौर पर मजबूत होंगी तो वे अपने परिवार की भी जिम्मेदारी उठा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष हर क्षेत्र में कार्य कर सकता है तो महिलाएं क्यों नहीं? महिलाएं भी बड़ी अधिकारी बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से मजबूत होने से बेटियां बुलंदियों को छू सकती हैं।
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