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बारिश से विद्युत उत्पादन में मामूली इजाफा
Updated Mon, 11 Jun 2018 11:43 PM IST
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रौजा स्थित दुर्गा पंडाल के सामने से गुजरा बिजली का केबल।
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अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)।
प्री मानसून के चलते गिरिनगर स्थित पावर हाउस में उत्पादन क्षमता बढ़कर 18 मेगावाट पर पहुंच गई है। रविवार को क्षेत्र में हुई जबरदस्त वर्षा के चलते विद्युत उत्पादन में मामूली इजाफा दर्ज किया गया। सोमवार की सुबह उत्पादन क्षमता बढ़कर 18 मेगावाट पर जा टिकी। जबकि, इससे पूर्व बारिश न होने से जलस्तर में कमी के कारण उत्पादन मात्रा 12 मेगावाट पर ही टिकी थी। हालांकि, अभी भी 30 फीसदी उत्पादन ही संभव हो पाया है।
दो टरबाइनों में से एक से केवल 20 घंटे ही काम लिया जा रहा है। 4 घंटे के लिए अभी भी मशीनों को बंद रखना पड़ रहा है। यदि वर्षा होती है तो उत्पादन बढ़ने के आसार हैं। विद्युत गृह में शत प्रतिशत 60 मेगावाट उत्पादन के लिए 47.6 क्यूमेक्स पानी की आवश्यकता होती है लेकिन इन दिनों पानी का डिस्चार्ज मात्र 9.6 क्यूमेक्स पर ही टिका हुआ है जिससे 18 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।
उधर, जटोन बैराज के सहायक अभियंता कमलजीत शर्मा ने बताया कि रविवार को हुई हल्की बारिश के चलते उत्पादन को मामूली इजाफा मिला है। एक टरबाइन मशीन से 20 घंटे में मात्र 18 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। बारिश के बाद पावर हाउस में विद्युत क्षमता बढ़ने की पूरी संभावनाएं हैं।
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ददाहू (सिरमौर)।
प्री मानसून के चलते गिरिनगर स्थित पावर हाउस में उत्पादन क्षमता बढ़कर 18 मेगावाट पर पहुंच गई है। रविवार को क्षेत्र में हुई जबरदस्त वर्षा के चलते विद्युत उत्पादन में मामूली इजाफा दर्ज किया गया। सोमवार की सुबह उत्पादन क्षमता बढ़कर 18 मेगावाट पर जा टिकी। जबकि, इससे पूर्व बारिश न होने से जलस्तर में कमी के कारण उत्पादन मात्रा 12 मेगावाट पर ही टिकी थी। हालांकि, अभी भी 30 फीसदी उत्पादन ही संभव हो पाया है।
दो टरबाइनों में से एक से केवल 20 घंटे ही काम लिया जा रहा है। 4 घंटे के लिए अभी भी मशीनों को बंद रखना पड़ रहा है। यदि वर्षा होती है तो उत्पादन बढ़ने के आसार हैं। विद्युत गृह में शत प्रतिशत 60 मेगावाट उत्पादन के लिए 47.6 क्यूमेक्स पानी की आवश्यकता होती है लेकिन इन दिनों पानी का डिस्चार्ज मात्र 9.6 क्यूमेक्स पर ही टिका हुआ है जिससे 18 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।
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उधर, जटोन बैराज के सहायक अभियंता कमलजीत शर्मा ने बताया कि रविवार को हुई हल्की बारिश के चलते उत्पादन को मामूली इजाफा मिला है। एक टरबाइन मशीन से 20 घंटे में मात्र 18 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। बारिश के बाद पावर हाउस में विद्युत क्षमता बढ़ने की पूरी संभावनाएं हैं।
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