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Rampur Bushahar News: स्कूल से उठा कबाड़, मचा बवाल
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शहीद डोला राम वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नित्थर में कबाड़ पर बवाल
कबाड़ बिक्री पर उठे सवाल, पारदर्शिता को लेकर स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)।
शहीद डोला राम वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नित्थर से बुधवार को कबाड़ उठाया गया, जिसपर बवाल मच गया। स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर से कबाड़ सामग्री को वाहन के माध्यम से ले जाते हुए देखा। इसके बाद कबाड़ बिक्री की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कबाड़ की बिक्री से पूर्व न तो विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक की जानकारी सार्वजनिक की गई और न ही कबाड़ खरीदने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए कोई सूचना, निविदा और इश्तहार जारी किया गया। उनका कहना है कि यदि सरकारी विद्यालय की संपत्ति का निस्तारण किया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं नियमानुसार होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि विद्यालय प्रशासन स्पष्ट करें कि कबाड़ बिक्री किस नियम के तहत की गई और कब बैठक हुई। किसके अनुमोदन से बिक्री हुई, कितने खरीदारों से दरें प्राप्त की गईं और कबाड़ किस मूल्य पर बेचा गया। स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग उठाई। लोगों ने मांग की है कि यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कबाड़ की बिक्री बिना विधिवत बैठक, सूची तैयार किए और पारदर्शी प्रक्रिया से हुई है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विद्यालय की कौन-कौन सी वस्तुओं को कबाड़ घोषित किया गया था। कबाड़ की विस्तृत सूची, स्टॉक रजिस्टर से मिलान, वजन, मूल्य और बिक्री से प्राप्त राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। एसएमसी के अध्यक्ष धर्मपाल का कहना है कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
कोई कीमती सामान नहीं बेचा गया है। बहुत पुरानी किताबें थीं और पुराना ड्रम था, जिससे बच्चों के हाथ कट रहे थे। इसके अलावा और कोई सामान नहीं बेचा गया है। - देवेंद्र वर्मा,
कार्यकारी प्रधानाचार्य
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कबाड़ बिक्री पर उठे सवाल, पारदर्शिता को लेकर स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)।
शहीद डोला राम वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नित्थर से बुधवार को कबाड़ उठाया गया, जिसपर बवाल मच गया। स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर से कबाड़ सामग्री को वाहन के माध्यम से ले जाते हुए देखा। इसके बाद कबाड़ बिक्री की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कबाड़ की बिक्री से पूर्व न तो विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक की जानकारी सार्वजनिक की गई और न ही कबाड़ खरीदने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए कोई सूचना, निविदा और इश्तहार जारी किया गया। उनका कहना है कि यदि सरकारी विद्यालय की संपत्ति का निस्तारण किया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं नियमानुसार होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि विद्यालय प्रशासन स्पष्ट करें कि कबाड़ बिक्री किस नियम के तहत की गई और कब बैठक हुई। किसके अनुमोदन से बिक्री हुई, कितने खरीदारों से दरें प्राप्त की गईं और कबाड़ किस मूल्य पर बेचा गया। स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग उठाई। लोगों ने मांग की है कि यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कबाड़ की बिक्री बिना विधिवत बैठक, सूची तैयार किए और पारदर्शी प्रक्रिया से हुई है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विद्यालय की कौन-कौन सी वस्तुओं को कबाड़ घोषित किया गया था। कबाड़ की विस्तृत सूची, स्टॉक रजिस्टर से मिलान, वजन, मूल्य और बिक्री से प्राप्त राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। एसएमसी के अध्यक्ष धर्मपाल का कहना है कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
कोई कीमती सामान नहीं बेचा गया है। बहुत पुरानी किताबें थीं और पुराना ड्रम था, जिससे बच्चों के हाथ कट रहे थे। इसके अलावा और कोई सामान नहीं बेचा गया है। - देवेंद्र वर्मा,
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