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खनेरी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर निर्माण ने पकड़ी गति
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रामपुर बुशहर। आपात स्थिति में अहम भूमिका अदा करने वाले ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर दशकों से चार जिलों के लोग आस लगाए हुए हैं, जो जल्द ही पूरी होगी। खनेरी अस्पताल में 7.32 करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने से प्रदेश के चार जिलों की हजारों की आबादी लाभान्वित होगी। सेंटर का निर्माण कार्य इन दिनों जोर शोर से चल रहा है।
गौर हो कि रोजाना करीब एक हजार मरीजों की ओपीडी वाले खनेरी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर निर्माण की मांग दशकों से चली आ रही है। इस अस्पताल में शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी के हजारों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। दुर्घटना और आपात की स्थिति में जब मरीजों, घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया जाता है तो ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण मरीजों को शिमला रेफर किया जाता है। घायलों को शिमला पहुंचने के लिए 130 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस कारण गंभीर हालत में कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ गए हैं। ऐसे में लोगों की मांग को देखते हुए पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। डिजाइन और सरकार की अनदेखी के फेर में ट्रॉमा सेंटर भवन का निर्माण कार्य लटका रहा, हालांकि भवन निर्माण की तय सीमा को समाप्त हुए कई वर्ष गुजर चुके हैं। अब भवन निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। करीब वर्ष की अवधि में लोक निर्माण विभाग ट्रॉमा सेंटर भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा। आपात स्थिति में शिमला और चंडीगढ़ रेफर किए जाने वाले मरीजों और घायलों को इससे काफी राहत मिलेगी।
खनेरी अस्पताल के एमएस नरेंद्र मेहता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता वर्षों से महसूस की जा रही है। सेंटर न होने से गंभीर हालत के मरीजों को शिमला रेफर किया जाता है। ट्रॉमा सेंटर बनने से क्षेत्र के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।
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उधर, लोक निर्माण विभाग रामपुर के एक्सईएन एसके सोबती ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के निर्माण कार्य में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बहुमंजिला भवन पर 7.32 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
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गौर हो कि रोजाना करीब एक हजार मरीजों की ओपीडी वाले खनेरी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर निर्माण की मांग दशकों से चली आ रही है। इस अस्पताल में शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी के हजारों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। दुर्घटना और आपात की स्थिति में जब मरीजों, घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया जाता है तो ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण मरीजों को शिमला रेफर किया जाता है। घायलों को शिमला पहुंचने के लिए 130 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस कारण गंभीर हालत में कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ गए हैं। ऐसे में लोगों की मांग को देखते हुए पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। डिजाइन और सरकार की अनदेखी के फेर में ट्रॉमा सेंटर भवन का निर्माण कार्य लटका रहा, हालांकि भवन निर्माण की तय सीमा को समाप्त हुए कई वर्ष गुजर चुके हैं। अब भवन निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। करीब वर्ष की अवधि में लोक निर्माण विभाग ट्रॉमा सेंटर भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा। आपात स्थिति में शिमला और चंडीगढ़ रेफर किए जाने वाले मरीजों और घायलों को इससे काफी राहत मिलेगी।
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खनेरी अस्पताल के एमएस नरेंद्र मेहता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता वर्षों से महसूस की जा रही है। सेंटर न होने से गंभीर हालत के मरीजों को शिमला रेफर किया जाता है। ट्रॉमा सेंटर बनने से क्षेत्र के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।
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उधर, लोक निर्माण विभाग रामपुर के एक्सईएन एसके सोबती ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के निर्माण कार्य में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बहुमंजिला भवन पर 7.32 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।