{"_id":"62979bcb83d50d634d6f9c21","slug":"tree-cutting-case-forest-department-complained-after-three-days-rampur-hp-news-sml410767049","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेड़ कटान मामला : वन विभाग ने तीन दिन बाद की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेड़ कटान मामला : वन विभाग ने तीन दिन बाद की शिकायत
विज्ञापन
टिक्कर के जंगल में काटा गया पेड़।
- फोटो : RAMPUR-HP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहड़ू। टिक्कर रेंज में 74 अवैध पेड़ कटान का मामला कई सवाल खडे़ कर रहा है। पेड़ काटने की सूचना मिलने के तीन दिन बाद वन विभाग जागा और पुलिस में मामला दर्ज करवाया। इस मामले की वन विभाग, प्रदेश सरकार और उच्च अधिकारियों को 18 मई को सूचना दी गई थी। सरकार और विभाग की सुस्ती का आलम यह रहा कि उसने 21 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
माना जा रहा है कि मामले की अगर स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाएगी तो विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अवैध कटान को लेकर रोहड़ू वन डिविजन की टिक्कर रेंज पहले से संवेदनशील रही है। यहां टीडी की लकड़ी पर पहले से प्रतिबंध है। रेंज में टीडी बहाल करने के लिए विभाग ने कौन से मापदंड लगाए इस पर भी सवाल है। पेड़ कटान की शिकायत के बाद जंगलों से चिरानियों को भगाया गया। जांच शुरू होने के बाद रात को पेड़ों ठूंठों को जलाने में किसका हाथ रहा। जांच शुरू होने के दौरान सबूत मिटाने के जो प्रयास हुए उस पर लगातार अंगुलियां उठ रही हैं।
टिक्कर में वर्ष 2015 में वन रेंज कार्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर कायल और देवदार के 52 छोटे-बड़े पेड़ों के कटान का मामला सामने आया था। जांच के बाद गांव के लोगों की टीडी के अधिकार तक न्यायालय ने बंद कर दिए। सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ अरसे से वन विभाग ने लोगों की टीडी शुरू की दी थी। उसकी आड़ में अवैध कटान भी किया गया।
विज्ञापन
वन रेंज ऑफिसर की स्थायी नियुक्ति नहीं
टिक्कर में वन रेंज ऑफिसर की दो साल से स्थायी नियुक्ति तक नहीं। वन खंड अधिकारी का पद भी लंबे समय से खाली चल रहा है। ऐसे में एक वन रक्षक को जिम्मेवार ठहराना कितना सही माना जा सकता है। ऊपर से प्रतिनियुक्ति पर तैनात रेंज आफिसर पर इसकी गाज गिरना मामले में केवल विभागीय लीपापोती मानी जा रही है। विभाग को मिली शिकायत में बताया गया कि जांच शुरू होने तक जंगल में चिरानियों के चार डेरे काम का रहे थे। मंदिर के नाम पर जंगल से लकड़ी काटी गई। गुप्त सूचना के बाद आरोपियों को किसने बचाया इसको लेकर लोगों में सवाल उठ रहे हैं।
मामले का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं
वन विभाग शिमला वृत्त के मुख्य अरण्यपाल एसपी शर्मा ने कहा उनके पास मामले का विस्तृत ब्योरा नहीं है। मौके पर विभाग की टीम जांच कर रही है। टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
विज्ञापन
माना जा रहा है कि मामले की अगर स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाएगी तो विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अवैध कटान को लेकर रोहड़ू वन डिविजन की टिक्कर रेंज पहले से संवेदनशील रही है। यहां टीडी की लकड़ी पर पहले से प्रतिबंध है। रेंज में टीडी बहाल करने के लिए विभाग ने कौन से मापदंड लगाए इस पर भी सवाल है। पेड़ कटान की शिकायत के बाद जंगलों से चिरानियों को भगाया गया। जांच शुरू होने के बाद रात को पेड़ों ठूंठों को जलाने में किसका हाथ रहा। जांच शुरू होने के दौरान सबूत मिटाने के जो प्रयास हुए उस पर लगातार अंगुलियां उठ रही हैं।
विज्ञापन
टिक्कर में वर्ष 2015 में वन रेंज कार्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर कायल और देवदार के 52 छोटे-बड़े पेड़ों के कटान का मामला सामने आया था। जांच के बाद गांव के लोगों की टीडी के अधिकार तक न्यायालय ने बंद कर दिए। सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ अरसे से वन विभाग ने लोगों की टीडी शुरू की दी थी। उसकी आड़ में अवैध कटान भी किया गया।
विज्ञापन
वन रेंज ऑफिसर की स्थायी नियुक्ति नहीं
टिक्कर में वन रेंज ऑफिसर की दो साल से स्थायी नियुक्ति तक नहीं। वन खंड अधिकारी का पद भी लंबे समय से खाली चल रहा है। ऐसे में एक वन रक्षक को जिम्मेवार ठहराना कितना सही माना जा सकता है। ऊपर से प्रतिनियुक्ति पर तैनात रेंज आफिसर पर इसकी गाज गिरना मामले में केवल विभागीय लीपापोती मानी जा रही है। विभाग को मिली शिकायत में बताया गया कि जांच शुरू होने तक जंगल में चिरानियों के चार डेरे काम का रहे थे। मंदिर के नाम पर जंगल से लकड़ी काटी गई। गुप्त सूचना के बाद आरोपियों को किसने बचाया इसको लेकर लोगों में सवाल उठ रहे हैं।
मामले का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं
वन विभाग शिमला वृत्त के मुख्य अरण्यपाल एसपी शर्मा ने कहा उनके पास मामले का विस्तृत ब्योरा नहीं है। मौके पर विभाग की टीम जांच कर रही है। टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिक्रिया दी जा सकती है।