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किन्नौर में 26762 लोगों की हुई स्क्रीनिंग, चार टीबी मरीज मिले
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किन्नौर में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हुए। -संवाद
- फोटो : RAMPUR-HP
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में स्वास्थ्य विभाग की टीम को बीते आठ दिनों में चार क्षय रोगी मिले हैं। टीबी एक्टिव केस फाइडिंग अभियान में 26,762 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम टीबी रोगियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
गौर हो कि जिला किन्नौर में टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के 107 कर्मचारी घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग कर रही है। इसके तहत जिले में आठ दिनों में टीबी के चार रोगियों की पहचान करने में विभाग को सफलता हासिल हुई है।
जिले में 1 अगस्त से 8 अगस्त तक 26 762 लोगों में टीबी पहचान के लिए स्क्रीनिंग हो चुकी है। क्षय रोग अधिकारी किन्नौर डॉ. सुधीर सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार ने 31 अगस्त तक टीबी एक्टिव केस फाइडिंग अभियान शुरू किया है।
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अभियान के तहत किन्नौर में 8 दिनों में 4 टीबी रोगियों की पहचान की गई है। इसमें 2 निचार, एक सांगला और एक पूह का पुरुष शामिल है। नेगी ने कहा कि टीबी संक्रमित व्यक्ति ने एक साल में 15 से 16 दूसरे व्यक्ति को अपनी चपेट में लेता है। समय रहते टीबी मरीजों की पहचान हो जाए तो गांव में इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 8 अगस्त 2021 तक कुल 725 टीबी रोगी पाए गए हैं। इसमें 2018 में 138 पुरुष, 64 महिलाएं, 2019 में 140 पुरुष, 81 महिलाएं और 2020 में 117 पुरुष, 75 महिलाएं क्षय रोगी थे। 8 अगस्त 2021 तक 110 टीबी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
सीएमओ किन्नौर डॉ. सोनम ने कहा कि जिन लोगों को कोरोना हो चुका है, उन्हें अवश्य ही टीबी रोग की जांच करवानी चाहिए। कोरोना वायरस से व्यक्तियों के फेफड़े पहले ही कमजोर हो जाते हैं, ऐसे में टीबी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है।
किन्नौर में पुरुषों में टीबी मरीज अधिक पाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पुरुष आउटडोर का काम ज्यादा करते हैं, जिससे ज्यादा लोगों के साथ मिलना-जुलना रहता है। धूम्रपान करने से भी फेफड़े कमजोर होते हैं। इससे पुरुषों में टीबी रोग अधिक पाया जाता है।
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गौर हो कि जिला किन्नौर में टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के 107 कर्मचारी घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग कर रही है। इसके तहत जिले में आठ दिनों में टीबी के चार रोगियों की पहचान करने में विभाग को सफलता हासिल हुई है।
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जिले में 1 अगस्त से 8 अगस्त तक 26 762 लोगों में टीबी पहचान के लिए स्क्रीनिंग हो चुकी है। क्षय रोग अधिकारी किन्नौर डॉ. सुधीर सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार ने 31 अगस्त तक टीबी एक्टिव केस फाइडिंग अभियान शुरू किया है।
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अभियान के तहत किन्नौर में 8 दिनों में 4 टीबी रोगियों की पहचान की गई है। इसमें 2 निचार, एक सांगला और एक पूह का पुरुष शामिल है। नेगी ने कहा कि टीबी संक्रमित व्यक्ति ने एक साल में 15 से 16 दूसरे व्यक्ति को अपनी चपेट में लेता है। समय रहते टीबी मरीजों की पहचान हो जाए तो गांव में इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 8 अगस्त 2021 तक कुल 725 टीबी रोगी पाए गए हैं। इसमें 2018 में 138 पुरुष, 64 महिलाएं, 2019 में 140 पुरुष, 81 महिलाएं और 2020 में 117 पुरुष, 75 महिलाएं क्षय रोगी थे। 8 अगस्त 2021 तक 110 टीबी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
सीएमओ किन्नौर डॉ. सोनम ने कहा कि जिन लोगों को कोरोना हो चुका है, उन्हें अवश्य ही टीबी रोग की जांच करवानी चाहिए। कोरोना वायरस से व्यक्तियों के फेफड़े पहले ही कमजोर हो जाते हैं, ऐसे में टीबी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है।
किन्नौर में पुरुषों में टीबी मरीज अधिक पाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पुरुष आउटडोर का काम ज्यादा करते हैं, जिससे ज्यादा लोगों के साथ मिलना-जुलना रहता है। धूम्रपान करने से भी फेफड़े कमजोर होते हैं। इससे पुरुषों में टीबी रोग अधिक पाया जाता है।