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Rampur Bushahar News: वैदिक कृषि पद्धति से पैदावार बढ़ाने पर किया मंथन
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। कुपवी में वैदिक कृषि पर रविवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन शार्प संस्था के संस्थापक सदस्य नरवीर पंवार की पुण्य स्मृति में करवाया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ से बतौर विशेष अतिथि आरती और धीरेंद्र ने भाग लिया। संस्था के अध्यक्ष सुदर्शन धीरटा ने कहा कि कार्यशाला में योग साधना और मंत्रोच्चारण के माध्यम से खेती-बाड़ी की उस पद्धति फिर से पुनर्जीवित कर सकते हैं, जो कि वैदिक काल में विद्यमान थी। उसका इस्तेमाल करते हुए कैसे हम वैदिक-जैविक तरीके से बिना लागत के फसल उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता में कई गुणा सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि पद्धति कितनी सफल होती इसकी प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए दावे के अनुसार हमने जमीन की मिट्टी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। वैदिक कृषि की पद्धति का इस्तेमाल करने के 21 दिन बाद दोबारा वहीं से मिट्टी जांच के लिए भेजेंगे। उन्होंने कहा इसमें देखा जाएगा कि क्या असल में मिट्टी में इस बीच बिना खाद डाले मौजूद पोषक तत्वों में बेहतरी हुई या नहीं। इसके अलावा इसके इस्तेमाल से क्या फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षण सफल रहा तो आने वाले समय में कृषि की इस पद्धति को न केवल कुपवी बल्कि समूचे हिमाचल में बढ़ावा देने के लिए काम किया जाएगा।
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चौपाल (रोहड़ू)। कुपवी में वैदिक कृषि पर रविवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन शार्प संस्था के संस्थापक सदस्य नरवीर पंवार की पुण्य स्मृति में करवाया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ से बतौर विशेष अतिथि आरती और धीरेंद्र ने भाग लिया। संस्था के अध्यक्ष सुदर्शन धीरटा ने कहा कि कार्यशाला में योग साधना और मंत्रोच्चारण के माध्यम से खेती-बाड़ी की उस पद्धति फिर से पुनर्जीवित कर सकते हैं, जो कि वैदिक काल में विद्यमान थी। उसका इस्तेमाल करते हुए कैसे हम वैदिक-जैविक तरीके से बिना लागत के फसल उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता में कई गुणा सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि पद्धति कितनी सफल होती इसकी प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए दावे के अनुसार हमने जमीन की मिट्टी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। वैदिक कृषि की पद्धति का इस्तेमाल करने के 21 दिन बाद दोबारा वहीं से मिट्टी जांच के लिए भेजेंगे। उन्होंने कहा इसमें देखा जाएगा कि क्या असल में मिट्टी में इस बीच बिना खाद डाले मौजूद पोषक तत्वों में बेहतरी हुई या नहीं। इसके अलावा इसके इस्तेमाल से क्या फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षण सफल रहा तो आने वाले समय में कृषि की इस पद्धति को न केवल कुपवी बल्कि समूचे हिमाचल में बढ़ावा देने के लिए काम किया जाएगा।