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Rampur Bushahar News: निजीकरण और स्मार्ट मीटर के खिलाफ 12 को प्रदर्शन

Mon, 09 Feb 2026 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Feb 2026 11:25 PM IST
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. बिजली बोर्ड का निजीकरण बेहद घातक : सचिन
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बिजली सब्सिडी होगी खत्म और सस्ती दरों पर मिलना होगी बंद
उपभोक्ताओं को 15 से 20 रुपये प्रति यूनिट तक करना पड़ सकता भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के प्रस्तावित निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर 12 फरवरी को बिजली बोर्ड का घेराव करने का एलान किया है। विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसमें बिजली बोर्ड कर्मचारी, व्यापारिक संगठन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिड-डे-मील वर्कर, किसान-बागवान और पेंशनर भाग लेंगे। यह बात प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष सचिन चंदेल ने प्रेसवार्ता में कही। चंदेल ने कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण बेहद घातक होगा। इसके दुष्परिणाम सीधे कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि निजीकरण होते ही बिजली सब्सिडी खत्म हो जाएगी और सस्ती दरों पर बिजली मिलना बंद हो जाएगी। उपभोक्ताओं को 15 से 20 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। प्रत्येक उपभोक्ता से अगले 10 साल तक हर महीने करीब 90 रुपये वसूले जाएंगे। बिजली बोर्ड प्रदेश पेंशनर्स संघ के महासचिव अशोक भारद्वाज ने कहा कि बिजली बोर्ड के निजीकरण से पेंशनरों के भविष्य पर तलवार लटक जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिजली बोर्ड ही नहीं रहेगा तो पेंशन कैसे मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य के पेंशनर अंधकार में धकेले जा रहे हैं और बोर्ड के मूलभूत ढांचे के खिलाफ काम किया जा रहा है। निजीकरण से बेरोजगारी बढ़ेगी, सुरक्षा घटेगी और सामाजिक कल्याण योजनाएं खत्म हो जाएंगी। व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजय ने कहा कि स्मार्ट मीटर आम व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है। आगे और मुश्किलें बढ़ेंगी। उन्होंने 12 फरवरी के धरने में व्यापारियों की पूरी भागीदारी और समर्थन का एलान किया।

किसान नेता संदीप ने कहा कि बिजली के निजीकरण का सीधा और विपरीत असर खेती पर पड़ेगा। उन्होंने इसे किसानों पर पूंजीवादी नीतियों का हमला बताया। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड पर हमला वास्तव में प्रदेश की प्राकृतिक क्षमता पर उद्योगपतियों की नजर है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि विदेश व्यापार समझौते खेती, सेब, सब्जी और पशुपालन के लिए घातक होंगे। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स मिड-डे-मील वर्कर और आंगनबाड़ी कर्मचारी बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। इस मौके पर अशोक भारद्वाज, संदीप वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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