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रामपुर में श्रम और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन

Wed, 03 Feb 2021 07:05 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 07:05 PM IST
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Protest against labor and agricultural laws in Rampur
बिथल में सीटू कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते हुए। - फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। सीटू और केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर सीटू से संबंधित रामपुर क्षेत्र की सभी यूनियनों ने केंद्र सरकार के आम बजट और श्रम-कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। कामगारों ने 4 लेबर कोडों, तीन काले कृषि कानूनों, नए बिजली कानून 2020, स्कीम वर्कर्स और मनरेगा में बजट कटौती सहित सरकारी क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ रामपुर, झाकड़ी, नाथपा, ज्यूरी, दत्तनगर, नोगली, बड़ागांव, बिथल, कोटागाड़, मंगलाड़, बायल और निरमंड में सैकड़ों मजदूरों ने सड़क पर उतर कर हल्ला बोला। वहीं, चार मजदूर कोडों की प्रतियां भी फूंकी गईं।
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सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू रामपुर क्षेत्रीय कमेटी संयोजक नरेंद्र देष्टा, सह संयोजक नील दत्त, सीटू जिला उपाध्यक्ष राजेश, जिला कमेटी सदस्य पोविंद्र शर्मा, रिंकू राम, परस राम, राम दास, सनी और शेर सिंह ने रैली को संबोधित किया। इन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में लगातार तेजी के साथ कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ साल के अंतराल में बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
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कोरोना काल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपदाकाल को पूंजीपतियों के लिए अवसर में तबदील कर दिया है। यह सरकार मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी है। लगातार गरीबों के खिलाफ कार्य कर रही है। वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है।
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बजट में बैंक, बीमा, रेलवे, एयरपोर्टों, बंदरगाहों, ट्रांसपोर्ट, गैस पाइप लाइन, बिजली, सरकारी कंपनियों के गोदाम व खाली जमीन, सड़कों, स्टेडियम सहित ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण करके बेचने का रास्ता खोल दिया गया है। खुद को गरीबों की सरकार कहने वाली मोदी सरकार गरीबों को खत्म करने पर आमादा है। महिला सशक्तीकरण और नारी उत्थान के नारे देने वाली केंद्र सरकार ने गरीबों और महिलाओं को इस बजट में आर्थिक तौर पर कमजोर किया है।
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