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नाथपा झाकड़ी परियोजना विस्थापित समिति ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
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नाथपा झाकड़ी विस्थापित कल्याण समिति झाकड़ी के पदाधिकारी प्रैसवार्ता के दौरान
- फोटो : RAMPUR-HP
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परियोजना प्रभावितों को मिलने वाली राशि
पर 25 तक अपनी स्थिति स्पष्ट करें प्रत्याशी
नाथपा झाकड़ी परियोजना विस्थापित समिति की दो टूक, उपचुनाव के बहिष्कार की चेतावनी
परियोजना प्रभावितों की करोड़ों की रॉयल्टी पर कुंडली मार कर बैठी है सरकार : भारती
वर्षों से विद्युत उत्पादन की एक प्रतिशत राशि की मांग कर रहे विस्थापित
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। नाथपा झाकड़ी परियोजना विस्थापित कल्याण समिति ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेताया है कि यदि 25 अक्तूबर तक प्रभावितों को मिलने वाली राशि पर स्थिति स्पष्ट नहीं की तो समिति लोक सभा उपचुनाव का बहिष्कार करेगी।
25 को परियोजना से प्रभावित 16 पंचायतों के जन प्रतिनिधि और सदस्य एकमत होकर इसे लेकर अंतिम निर्णय लेंगे। समिति ने लोक सभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों से आह्वान किया है कि वे परियोजना की ओर से विद्युत उत्पादन कर प्रभावितों को मिलने वाली एक प्रतिशत राशि के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करें। समिति ने वर्तमान भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और चार वर्ष बाद भी प्रभावितों की मांगों पर सहमति न बनने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
रामपुर में प्रेसवार्ता के दौरान नाथपा झाकड़ी विस्थापित कल्याण समिति के अध्यक्ष भगत राम भारती ने बताया कि नाथपा झाकड़ी परियोजना ने वर्ष 2005 में कमिशनिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2009 में परियोजना में उत्पादित होने वाली बिजली की एक प्रतिशत राशि परियोजना प्रभावित 16 पंचायतों को देने को लेकर पॉलिसी का निर्माण किया गया था। वर्ष 2011 में इस पॉलिसी को लागू कर दिया गया, लेकिन तब से लेकर अब तक नाथपा झाकड़ी परियोजना के प्रभावितों को एक प्रतिशत रॉयल्टी राशि नहीं मिल पाई है। हालांकि परियोजना प्रबंधन की ओर से 12 प्रतिशत राशि के साथ प्रभावितों को दी जाने वाली एक प्रतिशत राशि भी सरकार को दी जा रही है, लेकिन यह निराशाजनक है कि प्रभावित इस राशि से वंचित हैं। भारती ने कहा कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने झाकड़ी पहुंचकर प्रभावितों को जल्द इस मसले को सुलझाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रभावितों के हाथ खाली हैं। 8 मार्च 2019 को राज्य स्तरीय नाथपा झाकड़ी सलाहकार समिति का गठन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं अध्यक्ष थे, लेकिन हैरानी की बात है कि करीब तीन वर्ष में इस समिति की एक भी बैठक आयोजित नहीं हो पाई है। भारती ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने प्रभावितों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। परियोजना से शिमला जिले की झाकड़ी, धारगौरा, गोपालपुर, सनारसा, मझेवली, दोफदा, मशनू, शाहधार, ज्यूरी, बधाल और किन्नौर जिले की नाथपा, निचार, सुंगरा, पौंडा, तरांडा और चौरा पंचायतें प्रभावित हुई हैं। इन सभी पंचायतों के जन प्रतिनिधि, महिला मंडल, युवक मंडल और ग्रामीण 25 अक्तूबर को झाकड़ी पहुंचकर चुनाव बहिष्कार को लेकर अपना अंतिम निर्णय लेंगे। इस मौके पर समिति के सचिव सुरेंद्र ठाकुर और कानूनी सलाहकार विनय मेहता मौजूद रहे।
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पर 25 तक अपनी स्थिति स्पष्ट करें प्रत्याशी
नाथपा झाकड़ी परियोजना विस्थापित समिति की दो टूक, उपचुनाव के बहिष्कार की चेतावनी
परियोजना प्रभावितों की करोड़ों की रॉयल्टी पर कुंडली मार कर बैठी है सरकार : भारती
वर्षों से विद्युत उत्पादन की एक प्रतिशत राशि की मांग कर रहे विस्थापित
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। नाथपा झाकड़ी परियोजना विस्थापित कल्याण समिति ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेताया है कि यदि 25 अक्तूबर तक प्रभावितों को मिलने वाली राशि पर स्थिति स्पष्ट नहीं की तो समिति लोक सभा उपचुनाव का बहिष्कार करेगी।
25 को परियोजना से प्रभावित 16 पंचायतों के जन प्रतिनिधि और सदस्य एकमत होकर इसे लेकर अंतिम निर्णय लेंगे। समिति ने लोक सभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों से आह्वान किया है कि वे परियोजना की ओर से विद्युत उत्पादन कर प्रभावितों को मिलने वाली एक प्रतिशत राशि के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करें। समिति ने वर्तमान भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और चार वर्ष बाद भी प्रभावितों की मांगों पर सहमति न बनने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
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रामपुर में प्रेसवार्ता के दौरान नाथपा झाकड़ी विस्थापित कल्याण समिति के अध्यक्ष भगत राम भारती ने बताया कि नाथपा झाकड़ी परियोजना ने वर्ष 2005 में कमिशनिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2009 में परियोजना में उत्पादित होने वाली बिजली की एक प्रतिशत राशि परियोजना प्रभावित 16 पंचायतों को देने को लेकर पॉलिसी का निर्माण किया गया था। वर्ष 2011 में इस पॉलिसी को लागू कर दिया गया, लेकिन तब से लेकर अब तक नाथपा झाकड़ी परियोजना के प्रभावितों को एक प्रतिशत रॉयल्टी राशि नहीं मिल पाई है। हालांकि परियोजना प्रबंधन की ओर से 12 प्रतिशत राशि के साथ प्रभावितों को दी जाने वाली एक प्रतिशत राशि भी सरकार को दी जा रही है, लेकिन यह निराशाजनक है कि प्रभावित इस राशि से वंचित हैं। भारती ने कहा कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने झाकड़ी पहुंचकर प्रभावितों को जल्द इस मसले को सुलझाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रभावितों के हाथ खाली हैं। 8 मार्च 2019 को राज्य स्तरीय नाथपा झाकड़ी सलाहकार समिति का गठन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं अध्यक्ष थे, लेकिन हैरानी की बात है कि करीब तीन वर्ष में इस समिति की एक भी बैठक आयोजित नहीं हो पाई है। भारती ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने प्रभावितों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। परियोजना से शिमला जिले की झाकड़ी, धारगौरा, गोपालपुर, सनारसा, मझेवली, दोफदा, मशनू, शाहधार, ज्यूरी, बधाल और किन्नौर जिले की नाथपा, निचार, सुंगरा, पौंडा, तरांडा और चौरा पंचायतें प्रभावित हुई हैं। इन सभी पंचायतों के जन प्रतिनिधि, महिला मंडल, युवक मंडल और ग्रामीण 25 अक्तूबर को झाकड़ी पहुंचकर चुनाव बहिष्कार को लेकर अपना अंतिम निर्णय लेंगे। इस मौके पर समिति के सचिव सुरेंद्र ठाकुर और कानूनी सलाहकार विनय मेहता मौजूद रहे।
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