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देवढांक गुफा से श्रीखंड महादेव पहुंचे थे महादेव
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देवढांक गुफा का मुख्यद्वार
- फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। निरमंड विकास खंड की गढ़ेज पंचायत के प्राचीन देव ढांक शिव गुफा मंदिर से श्री खंड महादेव के लिए गुप्त मार्ग है जो भीम डवारी के पास निकलता है। मान्यता है कि इस देवढांक गुफा मार्ग से महादेव श्रीखंड के मार्ग में भीम डवारी के लिए गए थे।
भस्मासुर को अमर होने और वरदान में दिए गए कंगन से किसी को भी भस्म करने की शक्ति का आशीर्वाद देने के बाद जब भस्मासुर भगवान शिव को भस्म करने के लिए पीछे पड़ा तो शिवजी ने बायल गांव से ठीक ऊपर नंदी शिवजी के वाहन को रखकर वे इस गुफा के गुप्त मार्ग से श्रीखंड महादेव के लिए गए। तब जा कर वे अपनी जान बचा पाए। भस्मासुर को इस गुप्त मार्ग का पता ही नहीं चला।
मान्यता यह भी है कि श्रीखंड महादेव के दर्शन को जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले भीम डवारी नामक स्थान पर आज भी भस्मासुर का वध करने पर जो खून गिरा उससे आज भी वहां पानी लाल नजर आता है। यहां भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर नृत्य किया और भस्मासुर को भी उसी तरह से नृत्य करने को कहा। भस्मासुर वरदान में मिले कंगन को जब वह सिर पर ले गया तो वह स्वयं ही भस्म हो गया था। आदि काल से इन्हीं मान्यताओं पर देव ढांक मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि और सावन के महीने में हजारों की संख्या में लोग गुफा के दर्शन करने और पूजा अर्चना को पहुंचते है।
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देव ढांक मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, उपप्रधान हरि सिंह और सचिव दलीप भंडारी कहना है कि हर साल शिवरात्रि के रोज दूर - दूर से और आसपास से हजारों की तादाद में लोग पहुंचते है। पूरा दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगा रहता है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि से एक रोज पहले नंदी बेल के पास और गुफा मंदिर परिसर में जागरण का आयोजन किया जाता है। लोगों के सहयोग और मंदिर में एकत्र होने वाले चढ़ावे से भंडारे का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। प्रशासन और पुलिस से भी मंदिर कमेटी ने सुरक्षा व्यवस्था को सही रखने के लिए जवान भेजने का आग्रह किया।
-बॉक्स-
देव ढांक मंदिर परिसर तक वाहनों से जाने के लिए सड़क बन चुकी है। हालांकि, पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए मंदिर कमेटी ने शिवभक्तों से रामपुर निरमंड सड़क से पैदल ही मंदिर तक पहुुंचने की अपील की है।
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भस्मासुर को अमर होने और वरदान में दिए गए कंगन से किसी को भी भस्म करने की शक्ति का आशीर्वाद देने के बाद जब भस्मासुर भगवान शिव को भस्म करने के लिए पीछे पड़ा तो शिवजी ने बायल गांव से ठीक ऊपर नंदी शिवजी के वाहन को रखकर वे इस गुफा के गुप्त मार्ग से श्रीखंड महादेव के लिए गए। तब जा कर वे अपनी जान बचा पाए। भस्मासुर को इस गुप्त मार्ग का पता ही नहीं चला।
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मान्यता यह भी है कि श्रीखंड महादेव के दर्शन को जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले भीम डवारी नामक स्थान पर आज भी भस्मासुर का वध करने पर जो खून गिरा उससे आज भी वहां पानी लाल नजर आता है। यहां भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर नृत्य किया और भस्मासुर को भी उसी तरह से नृत्य करने को कहा। भस्मासुर वरदान में मिले कंगन को जब वह सिर पर ले गया तो वह स्वयं ही भस्म हो गया था। आदि काल से इन्हीं मान्यताओं पर देव ढांक मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि और सावन के महीने में हजारों की संख्या में लोग गुफा के दर्शन करने और पूजा अर्चना को पहुंचते है।
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देव ढांक मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, उपप्रधान हरि सिंह और सचिव दलीप भंडारी कहना है कि हर साल शिवरात्रि के रोज दूर - दूर से और आसपास से हजारों की तादाद में लोग पहुंचते है। पूरा दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगा रहता है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि से एक रोज पहले नंदी बेल के पास और गुफा मंदिर परिसर में जागरण का आयोजन किया जाता है। लोगों के सहयोग और मंदिर में एकत्र होने वाले चढ़ावे से भंडारे का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। प्रशासन और पुलिस से भी मंदिर कमेटी ने सुरक्षा व्यवस्था को सही रखने के लिए जवान भेजने का आग्रह किया।
-बॉक्स-
देव ढांक मंदिर परिसर तक वाहनों से जाने के लिए सड़क बन चुकी है। हालांकि, पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए मंदिर कमेटी ने शिवभक्तों से रामपुर निरमंड सड़क से पैदल ही मंदिर तक पहुुंचने की अपील की है।