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कीटनाशकों के दामों में वृद्धि से टूटी किसानों की कमर : शाद
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रामपुर बुशहर। केंद्र और प्रदेश सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते आज समाज का हर वर्ग आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। किसानी और बागवानी दवाओं और उपकरणों में लगातार हो रही वृद्धि से किसान बागवानों की कमर टूट गई है। किसानी करना अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। इसके विरोध में किसान सभा 31 मार्च से पूर्व ब्लॉक स्तर पर सम्मेलन आयोजित करेगी।
हिमाचल किसान सभा जिला कमेटी शिमला की बैठक विश्रामगृह नारकंडा में सम्पन्न हुई। बैठक में किसान सभा के राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नवउदारवादी कृषि नीतियों के कारण कृषि आज के समय में घाटे का सौदा बन रही है। इन नीतियों से कृषि व बागवानी में लागत बढ़ रही है, क्योंकि खाद, दवाई, कीटनाशक और बीज के दाम बढ़ रहे हैं।
किसानों को मिलने वाली सब्सिडी को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने चार साल पहले किसान-बागवानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था। किसान-बागवानों की आय में तो कोई बढ़ोतरी नहीं हुई हैं, लेकिन इनके खर्चे जरूर दोगुने हो गए हैं।
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सरकार की इन नीतियों से किसान आत्महत्या कर रहा है। किसान सभा जिला शिमला महासचिव देवकी नंद ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खाद, फफूंदनाशक के दामों में भारी वृद्धि कर इस मंहगाई के दौर में किसानों के ऊपर और अधिक आर्थिक बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की इन नीतियों के खिलाफ 31 मार्च से पहले ब्लॉक स्तर पर सम्मेलन किए जाएंगे और आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। इस मौके पर सत्यवान पुंडीर, पूर्ण ठाकुर, जगदीश, जयशिव सिंह, दिनेश मेहता, राकेश वर्मा, राजेंद्र चौहान, हेम राज सहित अन्य मौजूद रहे।
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हिमाचल किसान सभा जिला कमेटी शिमला की बैठक विश्रामगृह नारकंडा में सम्पन्न हुई। बैठक में किसान सभा के राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नवउदारवादी कृषि नीतियों के कारण कृषि आज के समय में घाटे का सौदा बन रही है। इन नीतियों से कृषि व बागवानी में लागत बढ़ रही है, क्योंकि खाद, दवाई, कीटनाशक और बीज के दाम बढ़ रहे हैं।
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किसानों को मिलने वाली सब्सिडी को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने चार साल पहले किसान-बागवानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था। किसान-बागवानों की आय में तो कोई बढ़ोतरी नहीं हुई हैं, लेकिन इनके खर्चे जरूर दोगुने हो गए हैं।
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सरकार की इन नीतियों से किसान आत्महत्या कर रहा है। किसान सभा जिला शिमला महासचिव देवकी नंद ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खाद, फफूंदनाशक के दामों में भारी वृद्धि कर इस मंहगाई के दौर में किसानों के ऊपर और अधिक आर्थिक बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की इन नीतियों के खिलाफ 31 मार्च से पहले ब्लॉक स्तर पर सम्मेलन किए जाएंगे और आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। इस मौके पर सत्यवान पुंडीर, पूर्ण ठाकुर, जगदीश, जयशिव सिंह, दिनेश मेहता, राकेश वर्मा, राजेंद्र चौहान, हेम राज सहित अन्य मौजूद रहे।