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सरकारी चालकों-परिचालकों के साथ मारपीट का विरोध
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रामपुर बुशहर। परिवहन निगम के चालक और परिचालकों के साथ हाल ही के दिनों में हुई मारपीट की घटनाओं का हिमाचल परिवहन मजदूर संघ ने कड़ा विरोध किया हे। संघ ने परिवहन कर्मचारियों के लिए मेडी पर्सन एक्ट में संशोधन कर इसे और कठोर बनाने की मांग की है।
हिमाचल परिवहन मजदूर संघ की संयुक्त बैठक रामपुर में हुई। इसमें परिवहन कर्मचारियों के साथ आए दिन हो रही मारपीट की घटनाओं को लेकर रोष जताया गया। परिवहन मजदूर संघ के प्रदेश सचिव रविंद्र सिंह और रामपुर संघ इकाई अध्यक्ष हरीश कुमार, चालक यूनियन के अध्यक्ष दिलीप सिंह और प्रधान धर्म सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन पहले एक घटना सोलन में, दूसरी रामपुर और तीसरी बिलासपुर बस अड्डे पर हुई। हुड़दंगियों और निजी बस चालकों और परिचालकों ने निगम के कर्मियों के साथ मारपीट की घटनाओं को अंजाम दिया। आरोप लगाया कि निगम के चालक-परिचालकों के साथ मारपीट करने वाले इन लोगों को सरकार का संरक्षण हासिल है। संघ ने मांग की है कि अवैध रूप से सवारियां ढोने वालों पर भी रोक लगाई जाए और स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर परिवहन कर्मचारियों के लिए भी मेडी पर्सन एक्ट की तरह कठोर एक्ट बनाए जाएं। उन्होंने चेताया कि यदि इन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो परिवहन कर्मचारी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि आम जनता बाहरी राज्यों के लिए बस सुविधा न होने के कारण परेशान है और जो लोग बाहरी राज्यों में आवागमन कर रहे हैं, उनसे प्राइवेट सेक्टर के परिवहन संचालक कई गुना किराया वसूल रहे हैं। इस मौके पर संघ के दर्जनों सदस्य मौजूद रहे।
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हिमाचल परिवहन मजदूर संघ की संयुक्त बैठक रामपुर में हुई। इसमें परिवहन कर्मचारियों के साथ आए दिन हो रही मारपीट की घटनाओं को लेकर रोष जताया गया। परिवहन मजदूर संघ के प्रदेश सचिव रविंद्र सिंह और रामपुर संघ इकाई अध्यक्ष हरीश कुमार, चालक यूनियन के अध्यक्ष दिलीप सिंह और प्रधान धर्म सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन पहले एक घटना सोलन में, दूसरी रामपुर और तीसरी बिलासपुर बस अड्डे पर हुई। हुड़दंगियों और निजी बस चालकों और परिचालकों ने निगम के कर्मियों के साथ मारपीट की घटनाओं को अंजाम दिया। आरोप लगाया कि निगम के चालक-परिचालकों के साथ मारपीट करने वाले इन लोगों को सरकार का संरक्षण हासिल है। संघ ने मांग की है कि अवैध रूप से सवारियां ढोने वालों पर भी रोक लगाई जाए और स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर परिवहन कर्मचारियों के लिए भी मेडी पर्सन एक्ट की तरह कठोर एक्ट बनाए जाएं। उन्होंने चेताया कि यदि इन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो परिवहन कर्मचारी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि आम जनता बाहरी राज्यों के लिए बस सुविधा न होने के कारण परेशान है और जो लोग बाहरी राज्यों में आवागमन कर रहे हैं, उनसे प्राइवेट सेक्टर के परिवहन संचालक कई गुना किराया वसूल रहे हैं। इस मौके पर संघ के दर्जनों सदस्य मौजूद रहे।
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