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Rampur Bushahar News: किसानों और बागवानों को दिया प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ( किन्नौर)। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौनी क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान परीक्षण केंद्र कृषि विज्ञान केंद्र रिकॉगपिओ के सौजन्य से रिकांगपिओ में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला किन्नौर के 40 किसान और बागवानों ने भाग लिया। इनमें 24 पुरुष और 16 महिलाओं ने भाग लिया। शिविर के दौरान डाॅ. बुद्धि राज नेगी किट वैज्ञानिक ने किसान-बागवानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने में जोर दिया।
उन्होंने प्राकृतिक खेती के मुख्य 4 स्तम्ब जो कि वीजा अमृत, जीब अमृत, अच्छा धन और बापसा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस मौके पर डाॅ. बुद्धिराम नेगी ने गोमूत्र और गोबर से बनने वाले घटक के महत्व पर भी जानकारी दी। उन्होंने ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जब गुणवत्ता युक्त एवं पौष्टिक उत्पादन तैयार होता है वे रोग मुक्त और लाभकारी सिद्ध होता है। दूसरी तरफ रसायनिक खेती की अपेक्षा प्राकृतिक खेती में बहुत ही कम खर्चा आता है। रसायनिक खेती से फसलों में अधिक बीमारी पनपती है, इसलिए किसानों को ज्यादातर प्राकृतिक खेती की ओर रुझान करना चाहिए। ताकि समाज में बीमारी कम हो सके।
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रिकांगपिओ( किन्नौर)। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौनी क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान परीक्षण केंद्र कृषि विज्ञान केंद्र रिकॉगपिओ के सौजन्य से रिकांगपिओ में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला किन्नौर के 40 किसान और बागवानों ने भाग लिया। इनमें 24 पुरुष और 16 महिलाओं ने भाग लिया। शिविर के दौरान डाॅ. बुद्धि राज नेगी किट वैज्ञानिक ने किसान-बागवानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने में जोर दिया।
उन्होंने प्राकृतिक खेती के मुख्य 4 स्तम्ब जो कि वीजा अमृत, जीब अमृत, अच्छा धन और बापसा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस मौके पर डाॅ. बुद्धिराम नेगी ने गोमूत्र और गोबर से बनने वाले घटक के महत्व पर भी जानकारी दी। उन्होंने ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जब गुणवत्ता युक्त एवं पौष्टिक उत्पादन तैयार होता है वे रोग मुक्त और लाभकारी सिद्ध होता है। दूसरी तरफ रसायनिक खेती की अपेक्षा प्राकृतिक खेती में बहुत ही कम खर्चा आता है। रसायनिक खेती से फसलों में अधिक बीमारी पनपती है, इसलिए किसानों को ज्यादातर प्राकृतिक खेती की ओर रुझान करना चाहिए। ताकि समाज में बीमारी कम हो सके।
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