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तलवारों, लाठियों और वाद्ययंत्रों की थाप पर दिनभर थिरके देवल़ ़

Thu, 12 Mar 2020 11:48 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 11:48 PM IST
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रामपुर बुशहर। चार दिवसीय जिला स्तरीय फाग मेले के दूसरे दिन तलवार, लाठियों और वाद्ययंत्रों की थाप पर दिनभर देवलु और श्रद्धालु थिरकते रहे। सुबह से ही महिलाएं देव दर्शन के लिए महल परिसर में जुट गईं। वीरवार को देवी-देवताओं के दर्शनों के लिए लोगों का भारी जनसैलाब उमड़ा। दरबार परिसर में देवताओं के दर्शनों के लिए लोग लंबी लंबी कतारों मे खड़े रहे। देवी-देवताओं ने पूरे शहर की परिक्रमा कर लोगों को सुख-समृद्धि का आशीष दिया। इस वर्ष मेले में 20 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया था, जिनमें से मेले में 19 देवी-देवता पहुंचे हैं।
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वीरवार को शहर के विभिन्न मंदिरों में ठहरे देवी-देवताओं ने करीब दस बजे अपने स्थलों से निकल कर बाजार की परिक्रमा की। परिक्रमा करते हुए जब देवता एनएच पांच पर पहुंचे तो मानो समय ठहर सा गया हो। लाठियों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवी-देवताओं संग देवलु जमकर झूमे। एनएच पर जाम की स्थिति भी बनती रही और लोगों को आवाजाही करने में पसीने छूटे। देवताओं के इस फेर को निहारने के लिए लोगों का भारी जनसमूह उमड़ा। करीब एक बजे देवताओं की परिक्रमा का दौर राज दरबार पहुंचा। यहां पर देवताओं ने सबसे पहले राजगद्दी का सम्मान किया और राज दरबार परिसर में अपने चयनित स्थान पर बैठे। क्षेत्र के लोग अपने अपने ईष्ट देवी-देवताओं संग वाद्य यंत्रों की थाप पर जमकर नाटी डाली। वहीं दूर दूर से आए श्रद्धालुओं ने भी अपने ईष्ट देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया और उन्हें इच्छानुसार राशि भेंट की। बुशहरी नाटी के अलावा कुल्लवी नाटी पर भी लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा के साथ दिनभर खूब थिरके। देर शाम तक राज दरबार में नाटियों को दौर जारी रहा। मेले में पहुंचे संदीप भलूनी, हर्ष कायथ, सोनू चौहान, इंद्रजीत, संजीव, राज कुमार, जय सिंह, यशपाल, यशवंत सिंह और पार्वती नेगी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐतिहासिक फाग मेले में जहां देवी-देवताओं को आशीष मिलता है, वहीं यह मेला आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। वहीं लंबे समय से एक दूसरे से दूर रहे रिश्तेदारों और दोस्तों का भी इस मेले में मिलन होता है, जो खुशी का पैगाम देता है।
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जलेबी और पकौड़ों के स्वाद से वंचित रहे मेले में आने वाले लोग
जिलास्तरीय फाग मेले के दूसरे दिन भी स्टाल और दुकानें नहीं सज पाई, जिस कारण मेले में पहुंचे हजारों लोगों को मेले के दौरान बिकने वाली मिठाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य प्रकार के सामान खरीदने की सुविधा की नहीं मिल पाई।
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