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चौपाल में मनाया ईद-उल-अजहा का त्योहार
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चौपाल (रोहड़ू)। उपमंडल चौपाल में ईद-उल-अजहा का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बुधवार सुबह मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की। नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश की खुशहाली, अमन चैन, आपसी भाईचारा, सांप्रदायिक सद्भावना सुदृढ़ करने के लिए दुआएं मांगी। ईद उल अजहा भी मुस्लिम समुदाय का एक पवित्र पर्व है, जो खुशियों का पैगाम लेकर आता है।
यह पर्व अल्लाह की राह में अपने को त्याग करने का संदेश देता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज मुकम्मल करता है। हज और उसके साथ जुड़ीं पद्धति हजरत इब्राहिम और उसके परिवार ने अल्लाह की राह में किए कार्यों को दोहराने का नाम है। हजरत इब्राहिम के परिवार में उनकी एक पत्नी हाजरा और पुत्र हजरत इस्माइल थे।
मुख्य सलाहकार ऑल इंडिया मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी नसीम दीदान ने कहा की ईद-उल-अजाह त्योहार पर 3 दिन तक कुर्बानियां होती है और सभी धर्मों के त्योहार, मानवता, आपसी एकता और सांप्रदायिक सद्भावना का संदेश देते हैं। आधुनिक समाज के निर्माण के लिए यह जरूरी है कि हमें धर्म और त्योहारों के आधार पर कट्टरपंथियों की सोच को बदलना चाहिए।
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यह पर्व अल्लाह की राह में अपने को त्याग करने का संदेश देता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज मुकम्मल करता है। हज और उसके साथ जुड़ीं पद्धति हजरत इब्राहिम और उसके परिवार ने अल्लाह की राह में किए कार्यों को दोहराने का नाम है। हजरत इब्राहिम के परिवार में उनकी एक पत्नी हाजरा और पुत्र हजरत इस्माइल थे।
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मुख्य सलाहकार ऑल इंडिया मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी नसीम दीदान ने कहा की ईद-उल-अजाह त्योहार पर 3 दिन तक कुर्बानियां होती है और सभी धर्मों के त्योहार, मानवता, आपसी एकता और सांप्रदायिक सद्भावना का संदेश देते हैं। आधुनिक समाज के निर्माण के लिए यह जरूरी है कि हमें धर्म और त्योहारों के आधार पर कट्टरपंथियों की सोच को बदलना चाहिए।
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