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Rampur Bushahar News: दशहरा उत्सव में नहीं करते शिरकत, फिर भी हर वर्ष पहुंचता है भोग और नजराना
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देवता साहिब कुई कंडा नाग
निमंत्रण के बाद भी कुल्लू दशहरे में शिरकत नहीं करते देवता साहिब कुईकंडा नाग
दशकों पूर्व कुल्लू पहुंचे थे देवता, प्रवेशद्वार के नीचे से गुजारने पर मचाया था तांडव
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। जिला कुल्लू देव आस्था से जुड़ा एक अहम क्षेत्र है। यहां कई देव परंपराएं हैं। ऐसी ही एक परंपरा आज भी कायम है। नित्थर क्षेत्र के आराध्य देवता कुईकंडा नाग को आज भी कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग लेने के लिए निमंत्रण पहुंचता है, लेकिन देवता इसमें भाग नहीं लेते। इसके बावजूद उत्सव आयोजन कमेटी की ओर से हर वर्ष देवता को नजराना राशि और भोग पहुंचता है।
आउटर सिराज क्षेत्र के देवता कुईकंडा नाग ऐसे देवता हैं, जो निमंत्रण के बावजूद भी कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग नहीं लेते हैं। मेले में न पहुंचने के बावजूद भी देवता को प्रतिवर्ष नजराना राशि और भोग नित्थर पहुंचाया जाता है। उपतहसील नित्थर की ग्राम पंचायत कुठेड़ में कुईकंडा नामक स्थान है और यहां देवता साहिब कुईकंडा नाग का वास है। कुईकंडा नाग माता बूढ़ी नागिन के ज्येष्ठ पुत्र हैं, जिनका वैदिक नाम भगवान अनंत और नाग नसेसर है। देवता का मंदिर नित्थर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवता पर न केवल स्थानीय लोगों में बल्कि नित्थर क्षेत्र के बाहर के लोगों में भी गहरी आस्था है। सिरीगढ़, नरेणगढ़ और हिमरीगढ़ के लाखों लोग कुईकंडा नाग में आस्था रखते हैं। आउटर सिराज क्षेत्र में केवल यही ऐसे देवता हैं, जो निमंत्रण के बावजूद भी दशहरे में शामिल नहीं होते हैं।
दशकों पूर्व जब देवता कुईकंडा नाग दशहरे में शिरकत करने कुल्लू पहुंचे, तो इन्हें प्रौढ़ (प्रवेशद्वार) के नीचे गुजारने की कोशिश की गई। इससे देवता गुस्से में आ गए और उन्होंने वहां ऐसा तांडव मचाया कि उस समय के राजा को कहना पड़ा कि इन्हें दशहरे में न लाया जाए और इनका नजराना हमेशा मिलता रहेगा। तबसे लेकर आज भी विधिवत रूप से भोग देवता साहिब को दिया जाता है। इसका प्रमाण कई सालों के तांदी मंदिर पहुंचे वो लोग हैं, जिन्होंने उस समय जबरदस्ती की और देवता साहिब को अपशब्द कहे। वो लोग और उनकी पीढि़या आज भी प्रभु के कोप का शिकार बने हुए हैं। मनाली के साथ लगते गांव के वे लोग प्रभु से क्षमा याचना करने इनके मंदिर में कई साल के बाद पहुंचे।
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हर साल हजारों लोग दर्शन को पहुंचते हैं
देवता कुईकंडा नाग के कारदार कमलेश रावत, गुर विनोद ठाकुर ने बताया कि देवता को प्रतिवर्ष दशहरे के लिए निमंत्रण भेजा जाता है। बावजूद इसके देवता मेले में भाग नहीं लेते हैं। देवता साहिब की मान्यता नित्थर क्षेत्र के अलावा और भी कई इलाकों में है। हर साल हजारों लोग देवता साहिब के दर्शन के लिए यहां आते हैं। इनके मंदिर कुईकंडा स्थान पर तांदी गांव में लोगों के सहयोग से बना है और ग्राम पंचायत लोट में भी मंदिर बन रहा है। दशहरा मेला कमेटी की ओर से देवता को दी जाने वाली नजराना राशि प्रतिवर्ष भेंट की जाती है, जिसे देवता की पूजन सामग्री और अन्य कार्यों में खर्च किया जाता है।
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दशकों पूर्व कुल्लू पहुंचे थे देवता, प्रवेशद्वार के नीचे से गुजारने पर मचाया था तांडव
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। जिला कुल्लू देव आस्था से जुड़ा एक अहम क्षेत्र है। यहां कई देव परंपराएं हैं। ऐसी ही एक परंपरा आज भी कायम है। नित्थर क्षेत्र के आराध्य देवता कुईकंडा नाग को आज भी कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग लेने के लिए निमंत्रण पहुंचता है, लेकिन देवता इसमें भाग नहीं लेते। इसके बावजूद उत्सव आयोजन कमेटी की ओर से हर वर्ष देवता को नजराना राशि और भोग पहुंचता है।
आउटर सिराज क्षेत्र के देवता कुईकंडा नाग ऐसे देवता हैं, जो निमंत्रण के बावजूद भी कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग नहीं लेते हैं। मेले में न पहुंचने के बावजूद भी देवता को प्रतिवर्ष नजराना राशि और भोग नित्थर पहुंचाया जाता है। उपतहसील नित्थर की ग्राम पंचायत कुठेड़ में कुईकंडा नामक स्थान है और यहां देवता साहिब कुईकंडा नाग का वास है। कुईकंडा नाग माता बूढ़ी नागिन के ज्येष्ठ पुत्र हैं, जिनका वैदिक नाम भगवान अनंत और नाग नसेसर है। देवता का मंदिर नित्थर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवता पर न केवल स्थानीय लोगों में बल्कि नित्थर क्षेत्र के बाहर के लोगों में भी गहरी आस्था है। सिरीगढ़, नरेणगढ़ और हिमरीगढ़ के लाखों लोग कुईकंडा नाग में आस्था रखते हैं। आउटर सिराज क्षेत्र में केवल यही ऐसे देवता हैं, जो निमंत्रण के बावजूद भी दशहरे में शामिल नहीं होते हैं।
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दशकों पूर्व जब देवता कुईकंडा नाग दशहरे में शिरकत करने कुल्लू पहुंचे, तो इन्हें प्रौढ़ (प्रवेशद्वार) के नीचे गुजारने की कोशिश की गई। इससे देवता गुस्से में आ गए और उन्होंने वहां ऐसा तांडव मचाया कि उस समय के राजा को कहना पड़ा कि इन्हें दशहरे में न लाया जाए और इनका नजराना हमेशा मिलता रहेगा। तबसे लेकर आज भी विधिवत रूप से भोग देवता साहिब को दिया जाता है। इसका प्रमाण कई सालों के तांदी मंदिर पहुंचे वो लोग हैं, जिन्होंने उस समय जबरदस्ती की और देवता साहिब को अपशब्द कहे। वो लोग और उनकी पीढि़या आज भी प्रभु के कोप का शिकार बने हुए हैं। मनाली के साथ लगते गांव के वे लोग प्रभु से क्षमा याचना करने इनके मंदिर में कई साल के बाद पहुंचे।
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हर साल हजारों लोग दर्शन को पहुंचते हैं
देवता कुईकंडा नाग के कारदार कमलेश रावत, गुर विनोद ठाकुर ने बताया कि देवता को प्रतिवर्ष दशहरे के लिए निमंत्रण भेजा जाता है। बावजूद इसके देवता मेले में भाग नहीं लेते हैं। देवता साहिब की मान्यता नित्थर क्षेत्र के अलावा और भी कई इलाकों में है। हर साल हजारों लोग देवता साहिब के दर्शन के लिए यहां आते हैं। इनके मंदिर कुईकंडा स्थान पर तांदी गांव में लोगों के सहयोग से बना है और ग्राम पंचायत लोट में भी मंदिर बन रहा है। दशहरा मेला कमेटी की ओर से देवता को दी जाने वाली नजराना राशि प्रतिवर्ष भेंट की जाती है, जिसे देवता की पूजन सामग्री और अन्य कार्यों में खर्च किया जाता है।