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भर्ती एवं सेवा शर्तें विधेयक कर्मचारियों के हितों से खिलवाड़ : कौल
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कर्मचारियों को नियुक्ति से मिलें वरिष्ठता और वित्तीय लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमकोफेड के पूर्व अध्यक्ष कौल सिंह नेगी ने जारी बयान में प्रदेश सरकार की ओर से पारित किए गए सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तें विधेयक-2024 का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार कर्मचारियों की हितैषी होने का दिखावा कर रही है, लेकिन असल में जब कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की बात आती है, उस समय ऐसे कर्मचारी विरोधी विधेयक पारित कर सरकार खुद का असली चेहरा बेनकाब कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को गंभीरतापूर्वक कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने इस फैसले को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा विधेयक लाने की कोई जरूरत नहीं थी। विधेयक को विधानसभा में लाने से पहले सरकार को कर्मचारियों से चर्चा करनी चाहिए थी और उनके सुझाव को भी सुना जाना आवश्यक था। कर्मचारी पहले ही सरकार की कार्यप्रणाली से नाखुश हैं। उन्होंने कर्मचारियों को नियुक्ति से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिए जाने का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को कर्मचारियों के विरोध के बावजूद भी इस विधेयक को पारित ही करना था तो इसमें ऐसे प्रावधान होने चाहिए थे, जिससे कर्मचारियों के हितों की रक्षा की बात हो। उन्होंने बिल को कर्मचारी विरोधी करार दिया और सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग उठाई। चेताया कि यदि इस कर्मचारी विरोधी विधेयक पर गंभीरता पूर्वक पुनर्विचार नहीं किया तो कर्मचारियों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमकोफेड के पूर्व अध्यक्ष कौल सिंह नेगी ने जारी बयान में प्रदेश सरकार की ओर से पारित किए गए सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तें विधेयक-2024 का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार कर्मचारियों की हितैषी होने का दिखावा कर रही है, लेकिन असल में जब कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की बात आती है, उस समय ऐसे कर्मचारी विरोधी विधेयक पारित कर सरकार खुद का असली चेहरा बेनकाब कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को गंभीरतापूर्वक कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने इस फैसले को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा विधेयक लाने की कोई जरूरत नहीं थी। विधेयक को विधानसभा में लाने से पहले सरकार को कर्मचारियों से चर्चा करनी चाहिए थी और उनके सुझाव को भी सुना जाना आवश्यक था। कर्मचारी पहले ही सरकार की कार्यप्रणाली से नाखुश हैं। उन्होंने कर्मचारियों को नियुक्ति से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिए जाने का समर्थन किया है।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार को कर्मचारियों के विरोध के बावजूद भी इस विधेयक को पारित ही करना था तो इसमें ऐसे प्रावधान होने चाहिए थे, जिससे कर्मचारियों के हितों की रक्षा की बात हो। उन्होंने बिल को कर्मचारी विरोधी करार दिया और सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग उठाई। चेताया कि यदि इस कर्मचारी विरोधी विधेयक पर गंभीरता पूर्वक पुनर्विचार नहीं किया तो कर्मचारियों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
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