{"_id":"69e613781cc1b9a3190535e0","slug":"dams-are-not-releasing-water-as-per-environmental-rules-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1032-158491-2026-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: पर्यावरण नियमों के अनुसार बांध नहीं छोड़ रहे पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: पर्यावरण नियमों के अनुसार बांध नहीं छोड़ रहे पानी
विज्ञापन
किन्नौर में जल विद्युत परियोजनाएं पर्यावरण नियमों की उड़ा रहीं धज्जियां
जन प्रतिनिधियों ने जताई चिंता, सरकार से की उचित कदम उठाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला(किन्नौर)। किन्नौर और शिमला जिले में बनी जल विद्युत परियोजनाएं भले ही राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग दे रही हों, लेकिन मुनाफे के चक्कर में प्रकृति को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जन प्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि परियोजनाओं के बांध स्थल से आगे नियमों के तहत पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे जलीय जंतु और जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
उनका कहना है कि कड़छम से झाकड़ी तक करीब 83 किलोमीटर के दायरे में नदी का जलस्तर घटने से प्रकृति प्रेमियों और जिले के जन प्रतिनिधियों में खासा रोष है। नियमों की अवहेलना पर सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चुप्पी साधे हुए हैं। किन्नौर की शुदारंग पंचायत के पूर्व प्रधान दलीप नेगी, रूपी पंचायत के पूर्व प्रधान रघुदास नेगी, कल्पा की पूर्व प्रधान सरीता नेगी, दुन्नी के पूर्व प्रधान दीवान सिंह नेगी, निचार के पूर्व प्रधान राजपाल नेगी, कोठी के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश नेगी, ख्वांगी की पूर्व प्रधान सत्या देवी नेगी, चगांव की पूर्व प्रधान तेजिंद्र नेगी, कोठी के पूर्व उपप्रधान महेश नेगी और सुंगरा के पूर्व उपप्रधान अजय नेगी का कहना है कि सांगला के कुप्पा स्थित बास्पा नदी पर बनी 300 मेगावाट जल विद्युत परियोजना, 1000 मेगावाट कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजना और 1500 मेगावाट नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना के बांध स्थल में परियोजनाओं की मनमानी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।
बांध स्थलों से इन दिनों पानी बहुत कम बाहर छोड़ा जा रहा है। ऐसे में बास्पा और सतलुज नदी में पल रही ट्राउट मछलियों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले के कुप्पा से कड़छम, कड़छम से नाथपा और नाथपा बांध स्थल से झाकड़ी तक करीब 83 किलोमीटर के दायरे में पल रहे मोनाल, मृग, कस्तूरी सहित कई वन्य प्राणियों के जीवन पर संकट है।
विज्ञापन
परियोजनाएं विद्युत उत्पादन बढ़ाने और फायदे के लिए पानी को नियमों के मुताबिक नहीं छोड़ रही हैं। नियमों के तहत विद्युत परियोजनाओं के बांध से 10 से 15 फीसदी जल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बाहर छोड़ना जरूरी होता है, जबकि परियोजनाएं नियमों को धत्ता बताकर कमाई कर रही हैं। लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नदियों में नियमानुसार पानी छोड़ा जाए। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द समस्या दूर नहीं हुई तो इस मामले को पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा।
बांध स्थल से नियमानुसार पानी छोड़ा जा रहा है। कंपनी की ओर से किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।
-कौशिक मौलिक, परियोजना प्रमुख, जेएसडब्ल्यू छोल्तू
अभी पानी का स्तर भी कम है। इसके बावजूद पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए नियमों के मुताबिक ही पानी बाहर छोड़ा जा रहा है।
-राजेश कुमार बिष्ट, बांध प्रमुख, नाथपा-झाकड़ी परियोजना
परियोजनाओं के बांध से कम पानी छोड़े जाने की कई मर्तबा शिकायतें मिल चुकी हैं। मौके पर विभाग की टीम भेजकर नियमानुसार पानी छोड़ने के निर्देश परियोजना प्रबंधन को दिए जाएंगे।
-दीपक डोगरा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रामपुर
विज्ञापन
जन प्रतिनिधियों ने जताई चिंता, सरकार से की उचित कदम उठाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला(किन्नौर)। किन्नौर और शिमला जिले में बनी जल विद्युत परियोजनाएं भले ही राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग दे रही हों, लेकिन मुनाफे के चक्कर में प्रकृति को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जन प्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि परियोजनाओं के बांध स्थल से आगे नियमों के तहत पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे जलीय जंतु और जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
उनका कहना है कि कड़छम से झाकड़ी तक करीब 83 किलोमीटर के दायरे में नदी का जलस्तर घटने से प्रकृति प्रेमियों और जिले के जन प्रतिनिधियों में खासा रोष है। नियमों की अवहेलना पर सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चुप्पी साधे हुए हैं। किन्नौर की शुदारंग पंचायत के पूर्व प्रधान दलीप नेगी, रूपी पंचायत के पूर्व प्रधान रघुदास नेगी, कल्पा की पूर्व प्रधान सरीता नेगी, दुन्नी के पूर्व प्रधान दीवान सिंह नेगी, निचार के पूर्व प्रधान राजपाल नेगी, कोठी के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश नेगी, ख्वांगी की पूर्व प्रधान सत्या देवी नेगी, चगांव की पूर्व प्रधान तेजिंद्र नेगी, कोठी के पूर्व उपप्रधान महेश नेगी और सुंगरा के पूर्व उपप्रधान अजय नेगी का कहना है कि सांगला के कुप्पा स्थित बास्पा नदी पर बनी 300 मेगावाट जल विद्युत परियोजना, 1000 मेगावाट कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजना और 1500 मेगावाट नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना के बांध स्थल में परियोजनाओं की मनमानी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।
विज्ञापन
बांध स्थलों से इन दिनों पानी बहुत कम बाहर छोड़ा जा रहा है। ऐसे में बास्पा और सतलुज नदी में पल रही ट्राउट मछलियों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले के कुप्पा से कड़छम, कड़छम से नाथपा और नाथपा बांध स्थल से झाकड़ी तक करीब 83 किलोमीटर के दायरे में पल रहे मोनाल, मृग, कस्तूरी सहित कई वन्य प्राणियों के जीवन पर संकट है।
विज्ञापन
परियोजनाएं विद्युत उत्पादन बढ़ाने और फायदे के लिए पानी को नियमों के मुताबिक नहीं छोड़ रही हैं। नियमों के तहत विद्युत परियोजनाओं के बांध से 10 से 15 फीसदी जल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बाहर छोड़ना जरूरी होता है, जबकि परियोजनाएं नियमों को धत्ता बताकर कमाई कर रही हैं। लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नदियों में नियमानुसार पानी छोड़ा जाए। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द समस्या दूर नहीं हुई तो इस मामले को पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा।
बांध स्थल से नियमानुसार पानी छोड़ा जा रहा है। कंपनी की ओर से किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।
-कौशिक मौलिक, परियोजना प्रमुख, जेएसडब्ल्यू छोल्तू
अभी पानी का स्तर भी कम है। इसके बावजूद पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए नियमों के मुताबिक ही पानी बाहर छोड़ा जा रहा है।
-राजेश कुमार बिष्ट, बांध प्रमुख, नाथपा-झाकड़ी परियोजना
परियोजनाओं के बांध से कम पानी छोड़े जाने की कई मर्तबा शिकायतें मिल चुकी हैं। मौके पर विभाग की टीम भेजकर नियमानुसार पानी छोड़ने के निर्देश परियोजना प्रबंधन को दिए जाएंगे।
-दीपक डोगरा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रामपुर