फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   चिट्ट के जाल में फंस रहे रोहड़ू के युवा

चिट्ट के जाल में फंस रहे रोहड़ू के युवा

Wed, 07 Mar 2018 09:16 PM IST
Updated Wed, 07 Mar 2018 09:16 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रोहड़ू।
क्षेत्र के दूरदराज गांव में चिट्टे का कारोबार पनपना शुरू हो चुका है। नशीली दवाइयों पर शिकंजा कसने के बाद पुलिस के लिए अब चिट्टे के काले धंधे को रोकना नई चुनौती बन चुका है। चिड़गांव पुलिस को मंगलवार को चिट्टे के साथ पकड़े गए युवक से इस काले कारोबार का राज खुलने की उम्मीद है। बीते कुछ माह से रोहड़ू के कई युवा इस नशे की चपेट में आ गए हैं।
गांव के कई ठिकानों पर स्थानीय युवाओं के सहयोग से इस नशीले जहर को बेचा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके कारोबारी पंजाब के बाद अब इस क्षेत्र में अपने पांव पसार रहे हैं। पुलिस को इसकी गुप्त सूचना जरूर होगी। लेकिन इसके कारोबारी को पकड़ने में अभी तक रोहड़ू उपमंडल की पुलिस को पहली सफलता चिड़गांव में मिली है। पुलिस ने दूरदराज खाबल गांव के एक युवक को दो ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है।
विज्ञापन


उत्तराखंड से आ रहीं नशीलीं दवाइयां
रोहड़ू उपमंडल में बीते दस साल में प्रतिबंधित नशीली दवाई का कारोबार चरम पर पहुंच चुका था। पुलिस ने बीते दो सालों में करीब दो दर्जन युवाओं को प्रतिबंधित दवाइयों के साथ गिरफतार किया। पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद दवाइयों की खेप यहां उत्तराखंड से पहुंचती रही। पकडे़ गए युवकों ने भी पुलिस के सामने इसका खुलासा किया था। पुलिस की सख्ती के बाद अब इस कारोबार से जुडे़ लोग युवाओं को चिट्टे के जाल में फंसा रहे हें।
विज्ञापन
विज्ञापन


च्टिटे की पहचान आसान नहीं
आम लोगों को अभी तक चिट्टे की पहचान करना आसान नहीं है। ऐसे में इससे जुडे़ लोग इसे आसानी से बेच रहे हैं। चिट्टे का हेरोइन के नाम से जाना जाता है। आज दुनियों में दस खतरनाक नशे में हेरोइन शुमार है। इसकी कीमत भी अन्य नशों से अधिक होती है।


जान ले लेता है चिट्टे का नशा
सिविल अस्पताल रोहड़ू के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रविंद्र शर्मा का कहना है चिट्टे का नशा करने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। चिट्टे में पांच गुना ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड और तीन गुना ज्यादा टार होता है। कार्बन मोनोऑक्साइड बगैर रंग और गंध वाली गैस रोगी की जान भी ले सकती है। कोकेन या क्रेक की आदत एक बार सेवन से भी हो सकती है। जरूरत से ज्यादा डोज लेने पर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। नशीली दवाओं के सेवन से रोगी को बहुत ही गंभीर किस्म का डीहायड्रेशन हो सकता है। इनके अलावा इसके सेवन से किडनी की बीमारी या डिप्रेशन में व्यक्ति चला जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed