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दलोज से वापस आ रहे तीन युवा बने काल का ग्रास
Updated Thu, 19 Jul 2018 09:48 PM IST
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हादसे ने छीन लिए तीन परिवारों के इकलौते चिराग
दलोज से वापस आ रहे तीन युवा बने काल का ग्रास
युवकों की मौत के बाद भावावैली में पसरा मातम
सुरजीत नेगी
भावानगर (किन्नौर)। पलिंगी-बरी सड़क हादसे से भावावैली में मातम पसर गया है। हादसे का शिकार बने तीनों युवक एक ही गांव के थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तीनों युवक बुधवार रात को यांगपा 2 से बरी में दलोज के लिए गए थे। वीरवार सुबह जब वह बरी गांव से दलोज से वापस लौट रहे थे तो विकासनगर के निकट हादसे का शिकार बन गए। हादसे की सूचना मिलते ही युवकों के परिजन और रिश्तेदार रोते बिखलते घटनास्थल पर पहुंचे। यह दलोज हादसे का शिकार बने सूर्यकांत का था। उसने आठ माह पहले बरी गांव की रंजना से विवाह किया था। वह शादी के बाद पहली बार अपनी पत्नी को मायके छोड़ने के लिए दलोज में ससुराल गया था। वह अपने मां-बाप का बुढ़ापे का सहारा था। उसके माता-पिता और पत्नी को जैसे ही हादसे का पता चला वो बेहोश हो गए। वहीं हादसे के शिकार दूसरे युवक नैन चंद के सिर से कई वर्ष पहले ही मां बाप का साया उठ चुका है। वह अपने चाचा नरज्ञल के बुढ़ापे का सहारा था। नैन चंद की एक बेटी निवेदिता नौवीं कक्षा, दूसरी बेटी जागृति सातवीं कक्षा और वंशिका पांचवीं कक्षा में पढ़ती है।
वहीं हादसे का शिकार हुआ तीसरा युवक योगेश्वर भी अपने मां-बाप का इकलौता चिराग था। उसका एक बेटा तीन साल और एक बेटा अभी एक साल का भी नहीं हुआ है। उसकी पत्नी को अपने पति की मौत का विश्वास ही नहीं हो रहा है। योगेश्वर ने दो सप्ताह पहले ही कार खरीदी थी, जो हादसे का शिकार हुई। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शवों को पैतृक गांव लाया गया है।
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दलोज से वापस आ रहे तीन युवा बने काल का ग्रास
युवकों की मौत के बाद भावावैली में पसरा मातम
सुरजीत नेगी
भावानगर (किन्नौर)। पलिंगी-बरी सड़क हादसे से भावावैली में मातम पसर गया है। हादसे का शिकार बने तीनों युवक एक ही गांव के थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तीनों युवक बुधवार रात को यांगपा 2 से बरी में दलोज के लिए गए थे। वीरवार सुबह जब वह बरी गांव से दलोज से वापस लौट रहे थे तो विकासनगर के निकट हादसे का शिकार बन गए। हादसे की सूचना मिलते ही युवकों के परिजन और रिश्तेदार रोते बिखलते घटनास्थल पर पहुंचे। यह दलोज हादसे का शिकार बने सूर्यकांत का था। उसने आठ माह पहले बरी गांव की रंजना से विवाह किया था। वह शादी के बाद पहली बार अपनी पत्नी को मायके छोड़ने के लिए दलोज में ससुराल गया था। वह अपने मां-बाप का बुढ़ापे का सहारा था। उसके माता-पिता और पत्नी को जैसे ही हादसे का पता चला वो बेहोश हो गए। वहीं हादसे के शिकार दूसरे युवक नैन चंद के सिर से कई वर्ष पहले ही मां बाप का साया उठ चुका है। वह अपने चाचा नरज्ञल के बुढ़ापे का सहारा था। नैन चंद की एक बेटी निवेदिता नौवीं कक्षा, दूसरी बेटी जागृति सातवीं कक्षा और वंशिका पांचवीं कक्षा में पढ़ती है।
वहीं हादसे का शिकार हुआ तीसरा युवक योगेश्वर भी अपने मां-बाप का इकलौता चिराग था। उसका एक बेटा तीन साल और एक बेटा अभी एक साल का भी नहीं हुआ है। उसकी पत्नी को अपने पति की मौत का विश्वास ही नहीं हो रहा है। योगेश्वर ने दो सप्ताह पहले ही कार खरीदी थी, जो हादसे का शिकार हुई। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शवों को पैतृक गांव लाया गया है।
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