{"_id":"5d5046c28ebc3e6d0179db39","slug":"apple-rampur-hp-news-sml3036449156","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडियों में सेब के दामों में आई एकाएक गिरावट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडियों में सेब के दामों में आई एकाएक गिरावट
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दलाश(कुल्लू)। सेब के दामों में एकाएक आई गिरावट ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। सेब मार्केट में सबसे अच्छी क्वालिटी का सेब आजकल 1000 से 1300 रुपये तक बिक रहा है। खेगसू और नारकंडा के आसपास की मंडियों में सेब के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं, जिससे बागवानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ऊपरी शिमला में इन दिनों सेब का सीजन पूरे जोरों पर है। कुछ समय पहले तक मंडियों में जो सेब 2000 रुपये पेटी के हिसाब से बिक रहा था। वही सेब इन दिनों 1000 से 1300 रुपये तक बिक रहा है। सेब के दामों में एकदम आई गिरावट से बागवान परेशान हैं। बागवानों ने सेब को अच्छा और लाल रंग बनाने के लिए सेब में इथ्रोल स्प्रे कर रखी है। ऐसे में यदि बागवान सेब तुड़ान का कार्य रोकते हैं तो बागवानों के सेब झड़ने शुरू हो जाएंगे। चूंकि सेब के लाल रंग के लिए की गई स्प्रे के बाद सेब को ज्यादा समय तक पेड़ों में नहीं रख सकते। मजबूरन बागवानों को सेब को मंडियों में सस्ते दामों पर बेचने पर विवश होना पड़ रहा है। सेब बागवान सुरेश कुमार, मोहर सिंह, विनोद कुमार और राजेश का कहना है कि जब शुरू में कच्चे और छोटे सेब ने मंडियों में दस्तक दी तो आढ़तियों ने उसे करीब 2500 रुपये पेटी के हिसाब से खरीदा, लेकिन अब जब पक्का और बड़ा सेब मार्केट पहुंच रहा है तो बागवानों की 1000 और 1300 रुपये में पेटी बिक रही है और छोटे सेब पिटू में 25 से 30 प्रतिशत कटौती की जा रही है, जिससे सेब पेटी की औसत 800 से 900 रुपये बैठ रही है।
खेगसू मंडी के आढ़ती योगेश वर्मा का कहना है कि देश की बड़ी मंडियों में इन दिनों बरसात के कारण बाढ़ आई हुई है, जिस कारण लदानी सेब खरीदने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। वहीं सेब मंडियों में सेब की आमद बढ़ रही है। उन्होंने बागवानों से अपील की है कि मंडियों में कच्चा सेब न लाएं।
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ऊपरी शिमला में इन दिनों सेब का सीजन पूरे जोरों पर है। कुछ समय पहले तक मंडियों में जो सेब 2000 रुपये पेटी के हिसाब से बिक रहा था। वही सेब इन दिनों 1000 से 1300 रुपये तक बिक रहा है। सेब के दामों में एकदम आई गिरावट से बागवान परेशान हैं। बागवानों ने सेब को अच्छा और लाल रंग बनाने के लिए सेब में इथ्रोल स्प्रे कर रखी है। ऐसे में यदि बागवान सेब तुड़ान का कार्य रोकते हैं तो बागवानों के सेब झड़ने शुरू हो जाएंगे। चूंकि सेब के लाल रंग के लिए की गई स्प्रे के बाद सेब को ज्यादा समय तक पेड़ों में नहीं रख सकते। मजबूरन बागवानों को सेब को मंडियों में सस्ते दामों पर बेचने पर विवश होना पड़ रहा है। सेब बागवान सुरेश कुमार, मोहर सिंह, विनोद कुमार और राजेश का कहना है कि जब शुरू में कच्चे और छोटे सेब ने मंडियों में दस्तक दी तो आढ़तियों ने उसे करीब 2500 रुपये पेटी के हिसाब से खरीदा, लेकिन अब जब पक्का और बड़ा सेब मार्केट पहुंच रहा है तो बागवानों की 1000 और 1300 रुपये में पेटी बिक रही है और छोटे सेब पिटू में 25 से 30 प्रतिशत कटौती की जा रही है, जिससे सेब पेटी की औसत 800 से 900 रुपये बैठ रही है।
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खेगसू मंडी के आढ़ती योगेश वर्मा का कहना है कि देश की बड़ी मंडियों में इन दिनों बरसात के कारण बाढ़ आई हुई है, जिस कारण लदानी सेब खरीदने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। वहीं सेब मंडियों में सेब की आमद बढ़ रही है। उन्होंने बागवानों से अपील की है कि मंडियों में कच्चा सेब न लाएं।
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