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किन्नौर में इस वर्ष घट सकता है सेब उत्पादन
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सांगला(किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में इस वर्ष सेब उत्पादन कम होने का अनुमान है। सेब की फ्लावरिंग के दौरान अधिक बारिश से तापमान में अचानक गिरावट आने से फसलें प्रभावित हुई हैं। इसके चलते इस वर्ष सेब का उत्पादन कम होगा। वहीं सर्दियों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण इस वर्ष सेब सीजन करीब 15 दिन देरी से शुरू होगा।
किन्नौर में इस वर्ष सर्दियों में हुई भारी बर्फाबारी से जिले के बागवानों के चेहरे खिल गए थे। बागवानों को सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन फ्लावरिंग स्टेज पर ही मौसम ने बागवानों को शुरुआती झटका दे दिया। समूचे जिले में जब फ्लावरिंग पूरे योवन पर थी तो अधिक बारिश से अचानक तापमान में गिरावट आने से नकदी फसल की अच्छी तरह से सेटिंग नहीं हो पाई। ऐसे में इस वर्ष जिले से करीब 29 लाख, तीस हजार, 900 पेटियां ही देश एवं विदेश के विभिन्न मंडियों तक पहुंच पाएंगी। हालांकि बीते वर्ष किन्नौर में 30 लाख, 18 हजार 197 सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था।
रिकांगपिओ उद्यान विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक किन्नौर से 29 लाख, 30 हजार, 900 पेटियां मंडियों में पहुंचने की संभावना है। कल्पा खंड से करीब 13 लाख, 20 हजार, आठ सौ, पूह खंड से करीब 11 लाख 47 हजार, जबकि निचार खंड से करीब 4 लाख, 63 हजार, 100 सेब की पेटियों का उत्पादन होने का अनुमान है। इस वर्ष भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड की वजह से सेब का सीजन 15 दिन लेट चल रहा है। सुरेश नेगी, गुरदयाल सिंह नेगी, दलीप सिंह नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी, वीरेंद्र सिंह नेगी, प्रताप सिंह नेगी, चंद्रप्रभा नेगी, चंद्रकांता नेगी, पवन नेगी, प्रमोद नेगी, प्रवीण नेगी, चंद्रेश नेगी, विद्या नेगी, राजकमल नेगी, सत्या प्रकाश नेगी, मनोज नेगी, दिव्या नेगी, दीपक नेगी, भुमनेश्वर नेगी और जियालाल नेगी सहित कई अन्य बागवानों का कहना है कि किन्नौर में परियोजनाओं के निर्माण से पर्यावरण में प्रतिकूल असर पड़ रहा है, इसके चलते कभी अधिक बर्फबारी तो कभी सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है और नकदी फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे किसान-बागवानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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15 दिन देरी से शुरू होगा सीजन
उद्यान विभाग किन्नौर के उपनिदेशक डॉ. हेम चंद शर्मा ने बताया कि सर्दियों में जिले में बर्फबारी तो अच्छी-खासी हुई, लेकिन फ्लावरिंग के दौरान अधिक बारिश से तापमान में गिरावट आने से फसलें प्रभावित हुई हैं। इस वर्ष करीब 15 दिन सेब का सीजन देरी से शुरू होगा।
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किन्नौर में इस वर्ष सर्दियों में हुई भारी बर्फाबारी से जिले के बागवानों के चेहरे खिल गए थे। बागवानों को सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन फ्लावरिंग स्टेज पर ही मौसम ने बागवानों को शुरुआती झटका दे दिया। समूचे जिले में जब फ्लावरिंग पूरे योवन पर थी तो अधिक बारिश से अचानक तापमान में गिरावट आने से नकदी फसल की अच्छी तरह से सेटिंग नहीं हो पाई। ऐसे में इस वर्ष जिले से करीब 29 लाख, तीस हजार, 900 पेटियां ही देश एवं विदेश के विभिन्न मंडियों तक पहुंच पाएंगी। हालांकि बीते वर्ष किन्नौर में 30 लाख, 18 हजार 197 सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था।
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रिकांगपिओ उद्यान विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक किन्नौर से 29 लाख, 30 हजार, 900 पेटियां मंडियों में पहुंचने की संभावना है। कल्पा खंड से करीब 13 लाख, 20 हजार, आठ सौ, पूह खंड से करीब 11 लाख 47 हजार, जबकि निचार खंड से करीब 4 लाख, 63 हजार, 100 सेब की पेटियों का उत्पादन होने का अनुमान है। इस वर्ष भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड की वजह से सेब का सीजन 15 दिन लेट चल रहा है। सुरेश नेगी, गुरदयाल सिंह नेगी, दलीप सिंह नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी, वीरेंद्र सिंह नेगी, प्रताप सिंह नेगी, चंद्रप्रभा नेगी, चंद्रकांता नेगी, पवन नेगी, प्रमोद नेगी, प्रवीण नेगी, चंद्रेश नेगी, विद्या नेगी, राजकमल नेगी, सत्या प्रकाश नेगी, मनोज नेगी, दिव्या नेगी, दीपक नेगी, भुमनेश्वर नेगी और जियालाल नेगी सहित कई अन्य बागवानों का कहना है कि किन्नौर में परियोजनाओं के निर्माण से पर्यावरण में प्रतिकूल असर पड़ रहा है, इसके चलते कभी अधिक बर्फबारी तो कभी सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है और नकदी फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे किसान-बागवानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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15 दिन देरी से शुरू होगा सीजन
उद्यान विभाग किन्नौर के उपनिदेशक डॉ. हेम चंद शर्मा ने बताया कि सर्दियों में जिले में बर्फबारी तो अच्छी-खासी हुई, लेकिन फ्लावरिंग के दौरान अधिक बारिश से तापमान में गिरावट आने से फसलें प्रभावित हुई हैं। इस वर्ष करीब 15 दिन सेब का सीजन देरी से शुरू होगा।