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मंडियों में सेब के दाम धड़ाम, बागवान परेशान

Sat, 21 Aug 2021 11:09 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Aug 2021 11:09 PM IST
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रामपुर उपमंडल के ननखडी में मंडियों में बेचने के लिए पेटियों में सेब पैकिंग करते बागवान - फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर/नित्थर/ननखड़ी। सेब के दामों में अचानक आई गिरावट ने बागवानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। स्थानीय सहित बाहरी राज्यों की मंडियों में सेब के दाम धड़ाम होने से बागवान परेशान हैं। सेब के उचित दाम नहीं मिलने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूबे के कई इलाकों में इन दिनों सेब सीजन जोरों पर है। मगर सेब दामों में आई गिरावट बागवानों के लिए परेशानियों का सबब बनी हुई है।
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रामपुर उपमंडल के सेरी मझाली, दरकाली, ननखड़ी तहसील और नित्थर उपतहसील के कई इलाकों में सेब सीजन चल रहा है। सेब के उचित दाम नहीं मिलने से बागवानों के होश फख्ता हो गए हैं। इसको देखते हुए बागवानों ने सेब तुड़ान भी रोक दिया है। ननखड़ी के बागवान शेर सिंह, गगन ठाकुर और प्रदीप कुमार ने बताया कि नारकंडा और चंडीगढ़ में सेब के दामों में भारी गिरावट आई है। रॉयल सेब प्रति पेटी 400 से 700 रुपये ही बिक रहा है।
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वहीं नित्थर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों एडशी, बुआई, केउरी, और कुठेड़ के बागवान भी सेब के दाम गिरने से चिंतित हैं। हालांकि इससे पहले निचले क्षेत्रों के बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिले। इसमें दो हजार से तीन हजार तक प्रति पेटी दाम मिले हैं। अब अचानक दाम गिरने से बागवानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। इन दिनों दाम गिरने से सेब की पेटी में जो खर्च तुड़ान, भरान और पेटी का मूल्य भी नहीं निकल रहा है।
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सुशील ठाकुर ने बताया कि एक तो पहले बेमौसम बर्फबारी और दूसरी तरफ ओलों ने सेब की फसल तबाह कर दी। अब बाकी कसर सेब के कम दामों ने पूरी कर दी है। खेगसू सब्जी मंडी में 1 हजार से 1100 रुपये के करीब प्रति पेटी सेब बिक रहा है। सिकंदर ठाकुर, विजय ठाकुर, सतपाल ठाकुर, राजेश, चिंटू ठाकुर और देविंद्र ठाकुर ने कहा कि एपीएमसी इसमें कुछ हस्तक्षेप करें, अन्यथा बागवानों की स्थिति बेहद खराब होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एपीएमसी अध्यक्ष कुल्लू एवं लाहौल स्पीति अमर ठाकुर से भी मांग उठाएंगे।

स्थानीय बागवानों ने कहा कि बागवान कड़ी मेहनत से सारा साल बगीचे में पसीना बहाते हैं और इसका फायदा आढ़ती और सेब के बड़े-बड़े व्यापारी उठाते हैं। वहीं किसान-बागवान ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई कि इस संबंध में हस्तक्षेप कर बागवानों को राहत प्रदान करें।
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