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डंगा गिरने से सेब के पौधे तबाह, मलबे में दबा वाहन
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पांगी गांव के नजदीक गिरा परियोजना का डंगा।
- फोटो : RAMPUR-HP
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जिले के पांगी गांव के पास पुराना हिंदुस्तान तिब्बत मार्ग से काशंग कंडा संपर्क मार्ग जीरो प्वाइंट पर विद्युत परियोजना का डंगा गिर गया है। यह डंगा एचपीपीसीएल की काशंग जल विद्युत परियोजना प्रबंधन की ओर से लगाया गया था। डंगा गिरने से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर गिर गया, जिससे सड़क पर खड़ा किया गया एक वाहन भी मलबे में दब गया है। वहीं, मलबे से सेब के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है।
पांगी निवासी छत्र कुमार ने कहा कि 28 जनवरी को उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने बताया था कि एचपीपीसीएल की काशंग परियोजना की ओर से वर्ष 2010 में डंगा लगाया गया है, जिसमें दरारें आ गई हैं। यह डंगा कभी भी गिर सकता है। डंगे की समय रहते मरम्मत के लिए छत्र कुमार ने कंपनी महाप्रबंधक को जुलाई 2020 में भी मांग पत्र सौंपा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगस्त 2020 में फिर से पंचायत प्रधान ने मौका देख कर कंपनी महाप्रबंधक को डंगे की मरम्मत के लिए प्रस्ताव जारी किया था, लेकिन कंपनी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। कंपनी प्रबंधन की लापरवाही और लेटलतीफी के चलते डंगा गिर गया।
कहा कि डंगा गिरने से उसका मलबा सेब के बगीचे में पहुंच गया और करीब एक दर्जन छोटे-बड़े सेब के पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। मोबाइल टावर को भी खतरा बना हुआ है। सड़क का कुछ हिस्सा भी टूट गया है, जिससे सड़क भी बंद हो गई है। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग की टीम मौके पर भेजी गई। पांगी के पटवारी शमशेर ने बताया कि करीब 15 लाख का नुकसान आंका गया है।
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विभाग की ओर से नुकसान का आकलन कर जिला आपदा प्रबंधन को रिपोर्ट भेज दी गई है। प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों को समय रहते सरकार और प्रशासन की ओर से नुकसान का सही मुआवजा देने का आश्वासन दिया।
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पांगी निवासी छत्र कुमार ने कहा कि 28 जनवरी को उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने बताया था कि एचपीपीसीएल की काशंग परियोजना की ओर से वर्ष 2010 में डंगा लगाया गया है, जिसमें दरारें आ गई हैं। यह डंगा कभी भी गिर सकता है। डंगे की समय रहते मरम्मत के लिए छत्र कुमार ने कंपनी महाप्रबंधक को जुलाई 2020 में भी मांग पत्र सौंपा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगस्त 2020 में फिर से पंचायत प्रधान ने मौका देख कर कंपनी महाप्रबंधक को डंगे की मरम्मत के लिए प्रस्ताव जारी किया था, लेकिन कंपनी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। कंपनी प्रबंधन की लापरवाही और लेटलतीफी के चलते डंगा गिर गया।
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कहा कि डंगा गिरने से उसका मलबा सेब के बगीचे में पहुंच गया और करीब एक दर्जन छोटे-बड़े सेब के पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। मोबाइल टावर को भी खतरा बना हुआ है। सड़क का कुछ हिस्सा भी टूट गया है, जिससे सड़क भी बंद हो गई है। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग की टीम मौके पर भेजी गई। पांगी के पटवारी शमशेर ने बताया कि करीब 15 लाख का नुकसान आंका गया है।
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विभाग की ओर से नुकसान का आकलन कर जिला आपदा प्रबंधन को रिपोर्ट भेज दी गई है। प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों को समय रहते सरकार और प्रशासन की ओर से नुकसान का सही मुआवजा देने का आश्वासन दिया।