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Rampur Bushahar News: सितंबर से पत्ते गिरने तक बगीचों की देखभाल जरूरी, अगली फसल की बनेगी नींव
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विशेषज्ञों ने बागवानों को नियमित निगरानी और वैज्ञानिक रखरखाव की दी सलाह
पत्तियों पर धब्बे, झुलसा या अन्य रोग के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञों से लें सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब तुड़ान के बाद सितंबर से पेड़ों के पत्ते गिरने तक का समय बागवानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस अवधि में उचित देखभाल से अगले वर्ष अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को नियमित निगरानी और वैज्ञानिक रखरखाव की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी और बागवानी विशेषज्ञ उषा शर्मा के अनुसार, सितंबर में सेब तुड़ान के बाद पेड़ों को स्वस्थ रखना आवश्यक है। इस समय पत्तियां सक्रिय रहती हैं। वे अगले वर्ष की फूल कलियों के विकास के लिए पोषक तत्व जमा करती हैं। तुड़ान के तुरंत बाद बगीचे में सिंचाई करें। सिंचाई मौसम और मिट्टी की नमी के अनुसार होनी चाहिए। बगीचे में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी रखें। खाद डालने का काम मिट्टी की जांच के आधार पर करें। अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कंपोस्ट का प्रयोग किया जा सकता है। फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता मिट्टी की जांच और पेड़ों की स्थिति के अनुसार पूरी करें। नाइट्रोजन की अधिक मात्रा से बचना चाहिए। सितंबर के बाद अनावश्यक नई बढ़वार पेड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
इस अवधि में रोग और कीटों की निगरानी जरूरी है। पत्तियों पर धब्बे, झुलसा या अन्य रोग के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञों से सलाह लें। तुड़ान के बाद गिरे हुए रोगग्रस्त पत्तों और फलों को इकट्ठा कर नष्ट करें। सूखी और रोगग्रस्त टहनियों को भी बगीचे से बाहर निकालें।
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पत्ते गिरने के समय बगीचे की सफाई पूरी कर लें। पत्तियां गिरने के बाद अनुशंसित शीतकालीन उपचार और छिड़काव करें। यह कृषि-बागवानी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए। उषा शर्मा ने कहा कि सितंबर से पत्ते गिरने तक पेड़ों की देखभाल में की गई छोटी सावधानियां अगले वर्ष फूल, फलन और पेड़ों के स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती हैं। इसलिए बागवानों को इस अवधि में बगीचों को खाली छोड़ने के बजाय लगातार निगरानी और आवश्यक प्रबंधन कार्य करते रहना चाहिए।
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पत्तियों पर धब्बे, झुलसा या अन्य रोग के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञों से लें सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब तुड़ान के बाद सितंबर से पेड़ों के पत्ते गिरने तक का समय बागवानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस अवधि में उचित देखभाल से अगले वर्ष अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को नियमित निगरानी और वैज्ञानिक रखरखाव की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी और बागवानी विशेषज्ञ उषा शर्मा के अनुसार, सितंबर में सेब तुड़ान के बाद पेड़ों को स्वस्थ रखना आवश्यक है। इस समय पत्तियां सक्रिय रहती हैं। वे अगले वर्ष की फूल कलियों के विकास के लिए पोषक तत्व जमा करती हैं। तुड़ान के तुरंत बाद बगीचे में सिंचाई करें। सिंचाई मौसम और मिट्टी की नमी के अनुसार होनी चाहिए। बगीचे में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी रखें। खाद डालने का काम मिट्टी की जांच के आधार पर करें। अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कंपोस्ट का प्रयोग किया जा सकता है। फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता मिट्टी की जांच और पेड़ों की स्थिति के अनुसार पूरी करें। नाइट्रोजन की अधिक मात्रा से बचना चाहिए। सितंबर के बाद अनावश्यक नई बढ़वार पेड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
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इस अवधि में रोग और कीटों की निगरानी जरूरी है। पत्तियों पर धब्बे, झुलसा या अन्य रोग के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञों से सलाह लें। तुड़ान के बाद गिरे हुए रोगग्रस्त पत्तों और फलों को इकट्ठा कर नष्ट करें। सूखी और रोगग्रस्त टहनियों को भी बगीचे से बाहर निकालें।
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पत्ते गिरने के समय बगीचे की सफाई पूरी कर लें। पत्तियां गिरने के बाद अनुशंसित शीतकालीन उपचार और छिड़काव करें। यह कृषि-बागवानी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए। उषा शर्मा ने कहा कि सितंबर से पत्ते गिरने तक पेड़ों की देखभाल में की गई छोटी सावधानियां अगले वर्ष फूल, फलन और पेड़ों के स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती हैं। इसलिए बागवानों को इस अवधि में बगीचों को खाली छोड़ने के बजाय लगातार निगरानी और आवश्यक प्रबंधन कार्य करते रहना चाहिए।