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Rampur Bushahar News: मारपीट मामले में आरोपी बरी, साक्ष्यों के अभाव में मिला संदेह का लाभ
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2014 को ननखड़ी में दो व्यक्तियों के बीच हुआ था विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ननखड़ी में लोहे की रॉड से हमला कर एक व्यक्ति को घायल करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामपुर बुशहर की अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को संदेह से परे साबित न होने पर आरोपी सुभाष ठाकुर को संदेह का लाभ दिया। अभियोजन के अनुसार, दो जुलाई 2014 को ननखड़ी में देशराज और सुभाष ठाकुर के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि आरोपी ने देशराज पर लोहे की रॉड से हमला कर उसे घायल कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। घायल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 325 और 506 के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि कई महत्वपूर्ण गवाह अपने बयानों से मुकर गए और शिकायतकर्ता के बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। शिकायतकर्ता को बचाने वाले बताए गए महत्वपूर्ण गवाह को भी अदालत में पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, जांच अधिकारी की मृत्यु होने के कारण उनका बयान दर्ज नहीं हो सका। अदालत ने माना कि गवाहों के बयानों में विसंगतियां होने और पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्य न मिलने के कारण आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ननखड़ी में लोहे की रॉड से हमला कर एक व्यक्ति को घायल करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामपुर बुशहर की अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को संदेह से परे साबित न होने पर आरोपी सुभाष ठाकुर को संदेह का लाभ दिया। अभियोजन के अनुसार, दो जुलाई 2014 को ननखड़ी में देशराज और सुभाष ठाकुर के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि आरोपी ने देशराज पर लोहे की रॉड से हमला कर उसे घायल कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। घायल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 325 और 506 के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि कई महत्वपूर्ण गवाह अपने बयानों से मुकर गए और शिकायतकर्ता के बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। शिकायतकर्ता को बचाने वाले बताए गए महत्वपूर्ण गवाह को भी अदालत में पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, जांच अधिकारी की मृत्यु होने के कारण उनका बयान दर्ज नहीं हो सका। अदालत ने माना कि गवाहों के बयानों में विसंगतियां होने और पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्य न मिलने के कारण आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।