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सांगला वैली के एक दर्जन गांव में फुल्याच शुरू
Updated Thu, 06 Sep 2018 10:16 PM IST
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सांगला वैली में नाटी से फुल्याच मेलों का आगाज
करीब एक दर्जन गांव में धूमधाम से मनाया जाता है पर्व
पर्व में विशेष प्रकार का फूल देवताओं पर चढ़ाते हैं लोग
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर जिले के रूपी के बाद अब अन्य क्षेत्रों में फुल्याच मेलों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में सांगला वैली के एक दर्जन से अधिक गांव में फुल्याच यानी उख्यांग पर्व धूमधाम के साथ शुरू हुआ।
किन्नौर जिले के पुनंग, रामनी, बारंग, मेबर, किल्बा, सापनी, कनई, बटुरी, बुरआ, शौंग, किल्बा, चांसु, कामरू, सांगला, बटसेरी और रक्षम सहित अन्य इलाकों में फुल्याच पर्व लोग बड़ी धूमधाम से मना रहे हैं। जिले भर में इस पर्व को मनाने के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की जाती हैं। अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए इस फूलों के त्यौहार को भादो माह में मनाया जाता है।
फुल्याच में ग्रामीण आपसी मतभेद भुलाकर पांच दिनों तक एक समय का भोजन देवी देवताओं द्वारा चिन्हित स्थान पर जाकर खुले आसमान के नीचे करते हैं। जिले विभिन्न इलाकों में 20 भादो से फुल्याच मनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पौराणिक सभ्यता और संस्कृति को संजोए रखने में फुल्याच आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंडों से विशेष किस्म का फूल लाने और आराध्य देवताओं को चढ़ाने और पूजा-अर्चना के बाद यह मेला शुरू होता है। पांच दिनों तक ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषाओं में सजधज कर नाटियों का खूब दौर चलाते हैं।
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बुधवार को सांगला के बटसेरी गांव में फुल्याच पर्व हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। क्षेत्र के आराध्य देवता बद्रीनारायण, विष्णु नारायण और तपोनारायण के मंदिर मेें ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे और इसके बाद देवता संग ग्रामीण बटसेरी स्कूल मैदान में पहुंचे। देवता के माथास यशवंत सिंह शानटेश्टो, पुजारी दयाकृष्ण दुध्यान ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फुल्याच धूमधाम से आयोजित हो रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को फुल्याच की शुभकामनाएं दीं।
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करीब एक दर्जन गांव में धूमधाम से मनाया जाता है पर्व
पर्व में विशेष प्रकार का फूल देवताओं पर चढ़ाते हैं लोग
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर जिले के रूपी के बाद अब अन्य क्षेत्रों में फुल्याच मेलों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में सांगला वैली के एक दर्जन से अधिक गांव में फुल्याच यानी उख्यांग पर्व धूमधाम के साथ शुरू हुआ।
किन्नौर जिले के पुनंग, रामनी, बारंग, मेबर, किल्बा, सापनी, कनई, बटुरी, बुरआ, शौंग, किल्बा, चांसु, कामरू, सांगला, बटसेरी और रक्षम सहित अन्य इलाकों में फुल्याच पर्व लोग बड़ी धूमधाम से मना रहे हैं। जिले भर में इस पर्व को मनाने के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित की जाती हैं। अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए इस फूलों के त्यौहार को भादो माह में मनाया जाता है।
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फुल्याच में ग्रामीण आपसी मतभेद भुलाकर पांच दिनों तक एक समय का भोजन देवी देवताओं द्वारा चिन्हित स्थान पर जाकर खुले आसमान के नीचे करते हैं। जिले विभिन्न इलाकों में 20 भादो से फुल्याच मनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पौराणिक सभ्यता और संस्कृति को संजोए रखने में फुल्याच आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंडों से विशेष किस्म का फूल लाने और आराध्य देवताओं को चढ़ाने और पूजा-अर्चना के बाद यह मेला शुरू होता है। पांच दिनों तक ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषाओं में सजधज कर नाटियों का खूब दौर चलाते हैं।
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बुधवार को सांगला के बटसेरी गांव में फुल्याच पर्व हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। क्षेत्र के आराध्य देवता बद्रीनारायण, विष्णु नारायण और तपोनारायण के मंदिर मेें ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे और इसके बाद देवता संग ग्रामीण बटसेरी स्कूल मैदान में पहुंचे। देवता के माथास यशवंत सिंह शानटेश्टो, पुजारी दयाकृष्ण दुध्यान ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फुल्याच धूमधाम से आयोजित हो रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को फुल्याच की शुभकामनाएं दीं।