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केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ सीटू ने निकाली रोष रैली
Updated Tue, 14 Aug 2018 10:12 PM IST
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केंद्र, प्रदेश सरकार के खिलाफ बोला हल्ला
एसडीएम कार्यालय के बाद किसानों, कामगारों ने किया प्रदर्शन
स्कीम वर्कर्स को स्थायी रोजगार देने की उठाई गई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। सीटू और किसानसभा ने रामपुर में मंगलवार को जिलास्तर पर की जा रहे 24 घंटे के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में रोष रैली निकाली। इस दौरान एसडीएम कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया।
रामपुर में सीटू और किसानसभा के बिहारी सेवगी और कुलदीप डोगरा ने कहा कि 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाली अखिल भारतीय मजदूर किसान रैली में सीटू ने अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय वर्कर्स यूनियन सहित देश के सभी मजदूर किसान भाग लेंगे। देश और प्रदेश में आरएसएस और भाजपा सरकार मेहनतकशों पर गंभीर आर्थिक, कृषि और सामाजिक तकलीफें बढ़ रही हैं और सरकारें मजदूर-किसान विरोधी नव उदारवादी और पूंजीवाद परस्त नीतियां लागू कर रही है। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था, लेकिन सरकार की घोषणाएं कोरी साबित हो रही हैं। देश में गरीबी और भ्रष्टाचार चरम पर है। विरोध प्रदर्शन के माध्यम से सीटू ने न्यूनतम वेतन 18000 रुपये देने, समान कार्य, समान वेतन, पूर्व में लागू किए गए श्रम कानूनों को लागू करने, मजदूरों को समय पर वेतन, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा और उनके भविष्य को देखते हुए ईपीएफ की सुविधाएं दी जानी चाहिए। स्कीम वर्कर्स को स्थायी रोजगार देने, मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन को वापस लेने सहित खाद्य सुरक्षा को लागू करने की मांग की। इस मौके पर सीटू नेता नीलदत्त, रामदास, नरेंद्र देष्टा, पोविंद्र शर्मा और आशु भारती सहित अन्य मौजूद रहे।
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एसडीएम कार्यालय के बाद किसानों, कामगारों ने किया प्रदर्शन
स्कीम वर्कर्स को स्थायी रोजगार देने की उठाई गई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। सीटू और किसानसभा ने रामपुर में मंगलवार को जिलास्तर पर की जा रहे 24 घंटे के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में रोष रैली निकाली। इस दौरान एसडीएम कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया।
रामपुर में सीटू और किसानसभा के बिहारी सेवगी और कुलदीप डोगरा ने कहा कि 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाली अखिल भारतीय मजदूर किसान रैली में सीटू ने अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय वर्कर्स यूनियन सहित देश के सभी मजदूर किसान भाग लेंगे। देश और प्रदेश में आरएसएस और भाजपा सरकार मेहनतकशों पर गंभीर आर्थिक, कृषि और सामाजिक तकलीफें बढ़ रही हैं और सरकारें मजदूर-किसान विरोधी नव उदारवादी और पूंजीवाद परस्त नीतियां लागू कर रही है। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था, लेकिन सरकार की घोषणाएं कोरी साबित हो रही हैं। देश में गरीबी और भ्रष्टाचार चरम पर है। विरोध प्रदर्शन के माध्यम से सीटू ने न्यूनतम वेतन 18000 रुपये देने, समान कार्य, समान वेतन, पूर्व में लागू किए गए श्रम कानूनों को लागू करने, मजदूरों को समय पर वेतन, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा और उनके भविष्य को देखते हुए ईपीएफ की सुविधाएं दी जानी चाहिए। स्कीम वर्कर्स को स्थायी रोजगार देने, मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन को वापस लेने सहित खाद्य सुरक्षा को लागू करने की मांग की। इस मौके पर सीटू नेता नीलदत्त, रामदास, नरेंद्र देष्टा, पोविंद्र शर्मा और आशु भारती सहित अन्य मौजूद रहे।
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