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तापमान में गिरावट सेब के लिए ठीक नहीं
Updated Wed, 11 Apr 2018 07:18 PM IST
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ओलावृष्टि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू।
ओलावृष्टि और भारी बारिश ने सेब के बगीचों में कहर ढा दिया है। क्षेत्र में दो दिन के दौरान पहले ओलावृष्टि हुई और उसके बाद लगातार 12 घंटे तक मूसलाधार बारिश ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इससे सेब के बगीचों में फूल और पत्ते झड़ गए हैं। बारिश से सेब के बगीचों में खिले फूलों को अधिक नुकसान हो गया है। इससे पहले चिड़गांव, कोटखाई सहित कई गांव में ओलावृष्टि ने दो बार तबाही मचाई है।
अब मौसम खुलने के बाद तापमान में आई कमी भी सेब की फसल के लिए नुकसान दायक मानी जा रही है। बागवानी विशेषज्ञ की मानें तो अधिक बारिश के कारण बगीचों में फूल खिलने के बाद प्रागण की प्रक्रिया रुक जाती है। खराब मौसम में मधुमक्खियां फूलों तक नहीं पहुंचती हैं। सेब के बगीचों में फूल खिलने के बाद आठ से 12 घंटे के बीच मौसम का साफ रहना जरूरी होता है। अच्छी पैदावार के लिए तापमान भी 14 से 25 डिग्री के बीच उचित माना जाता है। लेकिन मंगलवार से बारिश के बाद तापमान छह डिग्री तक पहुंच चुका है, जबकि आजकल पूरे क्षेत्र में मध्यम ऊंचाई तक के बगीचों में पूरा फूल निकला हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि खराब मौसम से पहले जिस बगीचे में फूल निकलने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां पर फसल के प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। लेकिन जहां पर आजकल पूरा फूल खिल रहा है, वहां पर बारिश के बाद प्रागण धुल जाते हैं। अधिक ठंड में मधुमक्खियां प्रागण नहीं कर पाती। इसलिए बडे़ भाग में जहां पर पूरे फूल खिल चुके, वहां फसल के प्रभावित होने की पूरी संभावना रहेगी। मौसम के कारण फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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रोहडू।
ओलावृष्टि और भारी बारिश ने सेब के बगीचों में कहर ढा दिया है। क्षेत्र में दो दिन के दौरान पहले ओलावृष्टि हुई और उसके बाद लगातार 12 घंटे तक मूसलाधार बारिश ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इससे सेब के बगीचों में फूल और पत्ते झड़ गए हैं। बारिश से सेब के बगीचों में खिले फूलों को अधिक नुकसान हो गया है। इससे पहले चिड़गांव, कोटखाई सहित कई गांव में ओलावृष्टि ने दो बार तबाही मचाई है।
अब मौसम खुलने के बाद तापमान में आई कमी भी सेब की फसल के लिए नुकसान दायक मानी जा रही है। बागवानी विशेषज्ञ की मानें तो अधिक बारिश के कारण बगीचों में फूल खिलने के बाद प्रागण की प्रक्रिया रुक जाती है। खराब मौसम में मधुमक्खियां फूलों तक नहीं पहुंचती हैं। सेब के बगीचों में फूल खिलने के बाद आठ से 12 घंटे के बीच मौसम का साफ रहना जरूरी होता है। अच्छी पैदावार के लिए तापमान भी 14 से 25 डिग्री के बीच उचित माना जाता है। लेकिन मंगलवार से बारिश के बाद तापमान छह डिग्री तक पहुंच चुका है, जबकि आजकल पूरे क्षेत्र में मध्यम ऊंचाई तक के बगीचों में पूरा फूल निकला हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि खराब मौसम से पहले जिस बगीचे में फूल निकलने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां पर फसल के प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। लेकिन जहां पर आजकल पूरा फूल खिल रहा है, वहां पर बारिश के बाद प्रागण धुल जाते हैं। अधिक ठंड में मधुमक्खियां प्रागण नहीं कर पाती। इसलिए बडे़ भाग में जहां पर पूरे फूल खिल चुके, वहां फसल के प्रभावित होने की पूरी संभावना रहेगी। मौसम के कारण फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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