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कूड़ा उठाने योजना के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप
Updated Tue, 13 Mar 2018 09:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
नगर परिषद रामपुर के सभी वार्डों में डोर टू डोर गारबेज गारबेज कलेक्शन टेंडर में हेराफेरी का आरोप लगाया है। टेंडर आवेदनकर्ता सुनीता देवी ने इस मामले की जांच करने के लिए एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा है। सुनीता का कहना कि है सभी वार्डों में सफाई के लिए टेंडर की निविदा सूचना पृष्ठाकंन संख्या 184 24 जनवरी 2018 को लिए जाने थे, जब टेंडर के लिए कार्यालय पहुंचे तो उनको टेंडर लगाने से रोका गया।
कहा कि उनके पास टेंडर फॉर्म नहीं है। उनका कहना है कि कार्यालय से जारी उपरोक्त निविदा सूचना में इस तरह की कोई शर्त नहीं है। इससे पहले इस तरह के फॉर्म जारी नहीं किए जाते थे। इस फॉर्म के बारे में उन्हें किसी कर्मचारी ने जानकारी नहीं दी। उन्होंने मांग की है टेंडर रद्द कर फिर लगाया जाए। उधर, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद रामपुर बीआर नेगी ने बताया कि नप के सभी वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठाने का कार्य ठेके पर दिया जाना था। इसके लिए सुनीता देवी ने 10 हजार रुपये जमा नहीं किए और न ही फॉर्म लिया था। उन्होंने कहा कि सुनीता के पास ईपीएफ नंबर और जीएसटी नंबर भी मौजूद नहीं था। जो आरोप लग रहे, वे निराधार हैं। जिन लोगों ने टेंडर भरा है, उनकी तुलनात्मक रिपोर्ट बनाई जा रही है।
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रामपुर बुशहर।
नगर परिषद रामपुर के सभी वार्डों में डोर टू डोर गारबेज गारबेज कलेक्शन टेंडर में हेराफेरी का आरोप लगाया है। टेंडर आवेदनकर्ता सुनीता देवी ने इस मामले की जांच करने के लिए एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा है। सुनीता का कहना कि है सभी वार्डों में सफाई के लिए टेंडर की निविदा सूचना पृष्ठाकंन संख्या 184 24 जनवरी 2018 को लिए जाने थे, जब टेंडर के लिए कार्यालय पहुंचे तो उनको टेंडर लगाने से रोका गया।
कहा कि उनके पास टेंडर फॉर्म नहीं है। उनका कहना है कि कार्यालय से जारी उपरोक्त निविदा सूचना में इस तरह की कोई शर्त नहीं है। इससे पहले इस तरह के फॉर्म जारी नहीं किए जाते थे। इस फॉर्म के बारे में उन्हें किसी कर्मचारी ने जानकारी नहीं दी। उन्होंने मांग की है टेंडर रद्द कर फिर लगाया जाए। उधर, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद रामपुर बीआर नेगी ने बताया कि नप के सभी वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठाने का कार्य ठेके पर दिया जाना था। इसके लिए सुनीता देवी ने 10 हजार रुपये जमा नहीं किए और न ही फॉर्म लिया था। उन्होंने कहा कि सुनीता के पास ईपीएफ नंबर और जीएसटी नंबर भी मौजूद नहीं था। जो आरोप लग रहे, वे निराधार हैं। जिन लोगों ने टेंडर भरा है, उनकी तुलनात्मक रिपोर्ट बनाई जा रही है।
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