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नाम वापस लेते ही फफक पड़े सुंदर नैंटा
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:02 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू़।
जुब्बल कोटखाई से कांग्रेस के बागी नेता रहे सुंदर सिंह नैटा नाम वापस लेते समय निर्वाचन अधिकारी जुब्बल के कार्यालय में फफक कर रो पड़े। नैटा ने परिवार और रिश्तेदारों के भारी दबाव के बीच वीरवार को नामांकन वापस ले लिया।
नैंटा मंडल कांग्रेस, जिला कांग्रेस के कई अहोदे पर रह चुके हैं। वे कांग्रेस सरकार में एग्रो पैकेजिंग के निर्देशक मंडल सदस्य भी रह चुके हैं। 2002 में सोनिया गांधी की शिलारू रैली के दौरान उनकी बस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को लेकर रैली में ले जाते समय गिर गई थी। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में उनका सगा भाई और कई रिश्तेदारों की मौत हुई थी। सुंदर सिंह नैंटा के परिवार में जुब्बल-कोटखाई से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित रोहित ठाकुर का ससुराल भी है। बीते कुछ समय से नैंटा कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। उनको मनाने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों के अलावा परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने लगतातार दबाव बनाया। वीरवार सुबह तक नैंटा नाम वापस लेने के लिए इनकार कर रहे। आखिरकार पारिवारिक दबाव के बाद उन्होंने जब नाम वापस लिया तो वे निर्वाचन अधिकारी कार्यालय जुब्बल में फूट-फूट कर रो पड़े।
सुंदर सिह नैंटा ने कहा परिवार के लोगों ने उनको नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया है। वे किसी राजनीतिक दबाव में पीछे नहीं हटे। इसलिए नाम वापस करना पड़ा है।
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रोहडू़।
जुब्बल कोटखाई से कांग्रेस के बागी नेता रहे सुंदर सिंह नैटा नाम वापस लेते समय निर्वाचन अधिकारी जुब्बल के कार्यालय में फफक कर रो पड़े। नैटा ने परिवार और रिश्तेदारों के भारी दबाव के बीच वीरवार को नामांकन वापस ले लिया।
नैंटा मंडल कांग्रेस, जिला कांग्रेस के कई अहोदे पर रह चुके हैं। वे कांग्रेस सरकार में एग्रो पैकेजिंग के निर्देशक मंडल सदस्य भी रह चुके हैं। 2002 में सोनिया गांधी की शिलारू रैली के दौरान उनकी बस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को लेकर रैली में ले जाते समय गिर गई थी। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में उनका सगा भाई और कई रिश्तेदारों की मौत हुई थी। सुंदर सिंह नैंटा के परिवार में जुब्बल-कोटखाई से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित रोहित ठाकुर का ससुराल भी है। बीते कुछ समय से नैंटा कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। उनको मनाने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों के अलावा परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने लगतातार दबाव बनाया। वीरवार सुबह तक नैंटा नाम वापस लेने के लिए इनकार कर रहे। आखिरकार पारिवारिक दबाव के बाद उन्होंने जब नाम वापस लिया तो वे निर्वाचन अधिकारी कार्यालय जुब्बल में फूट-फूट कर रो पड़े।
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सुंदर सिह नैंटा ने कहा परिवार के लोगों ने उनको नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया है। वे किसी राजनीतिक दबाव में पीछे नहीं हटे। इसलिए नाम वापस करना पड़ा है।
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