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वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नाचे ग्रामीण
Updated Fri, 01 Jun 2018 07:45 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
जुब्बल (रोहड़ू)।
भोलाड़ के देवता पवासी महाराज अपने देवलुओं के साथ उत्तराखंड के देववन की पैदल तीर्थ यात्रा से वापस पहुंच गए। देवता के आगमन पर गांव में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। देवता की आगमन की खुशी में स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान चिऊनी, पुजारली (मांदल), भड़ोट के ब्राह्मण विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
भोलाड़ से पवासी देवता महाराज आठ वर्ष बाद उत्तराखंड के देववन की तीर्थ यात्रा पर गए थे। 170 देवलुओं के साथ एक सप्ताह तक पैदल यात्रा कर देवता की पालकी देववन में तीर्थ स्नान कर वापस लौट आई है। तीर्थ यात्रा से आगमन पर देवता महाराज का जगह-जगह फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। पवासी देवता के बजीर कली राम ठाकुर, भंडारी ज्ञान सिंह हंसरेटा ने बताया कि आठ से दस वर्ष के अंतराल के दौरान पवासी देवता देववन की तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। तीर्थ यात्रा पूरी तरह सफल रही है। देवता के आगमन पर गांव में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना लेकर तीर्थ यात्रा पर गए थे।
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जुब्बल (रोहड़ू)।
भोलाड़ के देवता पवासी महाराज अपने देवलुओं के साथ उत्तराखंड के देववन की पैदल तीर्थ यात्रा से वापस पहुंच गए। देवता के आगमन पर गांव में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। देवता की आगमन की खुशी में स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान चिऊनी, पुजारली (मांदल), भड़ोट के ब्राह्मण विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
भोलाड़ से पवासी देवता महाराज आठ वर्ष बाद उत्तराखंड के देववन की तीर्थ यात्रा पर गए थे। 170 देवलुओं के साथ एक सप्ताह तक पैदल यात्रा कर देवता की पालकी देववन में तीर्थ स्नान कर वापस लौट आई है। तीर्थ यात्रा से आगमन पर देवता महाराज का जगह-जगह फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। पवासी देवता के बजीर कली राम ठाकुर, भंडारी ज्ञान सिंह हंसरेटा ने बताया कि आठ से दस वर्ष के अंतराल के दौरान पवासी देवता देववन की तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। तीर्थ यात्रा पूरी तरह सफल रही है। देवता के आगमन पर गांव में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना लेकर तीर्थ यात्रा पर गए थे।
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