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Rampur Bushahar News: 28 ग्राम चरस मामले में नाबालिग बरी, पुलिस जांच पर उठे सवाल

Fri, 04 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:59 PM IST
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मुख्य गवाह के बयान में विरोधाभास, चरस फेंकने की कहानी भी संदिग्ध लगी
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किशोर न्याय बोर्ड रामपुर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। किशोर न्याय बोर्ड रामपुर बुशहर ने 28 ग्राम चरस रखने के आरोप में नाबालिग को बरी कर दिया है। बोर्ड ने पुलिस की जांच को अविश्वसनीय और त्रुटिपूर्ण पाया। नाबालिग किशोर नेपाल मूल का है। उस पर मादक पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत आरोप थे। पुलिस ने एक अगस्त 2019 को आरोपी किशोर को किन्नौर के पोवारी में पकड़ा था। पुलिस के अनुसार, किशोर ने अपनी नीली जींस की दाहिनी जेब से एक सफेद पॉलिथीन निकालकर झाड़ियों में फेंका था। जांच में पॉलिथीन से 28 ग्राम चरस की दस छड़ें बरामद होने का दावा किया गया। पुलिस ने दो व्यक्तियों को गवाह बनाया था। हालांकि, किशोर न्याय बोर्ड ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए। बोर्ड ने पाया कि अभियोजन पक्ष किशोर के अपराध को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। बोर्ड ने जांच में कई खामियां और त्रुटियां पाईं, जिससे पूरी जांच अविश्वसनीय हो गई। अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह ने अपने बयान में विरोधाभास दिखाया। गवाह ने कहा कि उसने किशोर को कुछ भी फेंकते हुए नहीं देखा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस ने उसकी उपस्थिति में चरस को सील नहीं किया था। गवाह ने बताया कि बरामद चरस को पुलिस ने उसकी मौजूदगी में नहीं उठाया था। उसके बयान ने अभियोजन पक्ष की कहानी को कमजोर कर दिया।बोर्ड ने पाया कि एक तस्वीर में पुलिस अधिकारी झाड़ियों से पॉलिथीन उठाते दिख रहे हैं लेकिन इस तस्वीर में कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। मौके के नक्शे (स्पॉट मैप) में भी विसंगतियां पाई गईं। पुलिस वाहन की दिशा और किशोर की स्थिति के आधार पर चरस फेंकने की कहानी संदिग्ध लगी। अभियोजन पक्ष ने अन्य स्वतंत्र गवाहों की जांच नहीं की। किशोर न्याय बोर्ड ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र का मौलिक सिद्धांत है कि संदेह का लाभ हमेशा आरोपी को मिलता है। रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और परिस्थितियों ने अभियोजन पक्ष के संस्करण की सत्यता पर उचित संदेह पैदा किया। अभियोजन पक्ष अपने मामले को आवश्यक मानक के अनुसार साबित करने में विफल रहा, इसलिए बोर्ड ने नाबालिग किशोर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।
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