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वर्ल्ड बैंक की टीम ने किया बगीचों का निरीक्षण
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:29 PM IST
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टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
दलाश (कुल्लू)।
प्रदेश में सेब की पैदावार, गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वर्ल्ड बैंक की ओर से प्रायोजित और बागवानी विभाग के प्रोजेक्ट के तहत वर्ल्ड बैंक की टीम ने आनी के बारवी और नम्होंग क्लस्टर का दौरा किया। टीम ने शुक्रवार को प्रोजेक्ट के तहत गत वर्ष बगीचे में लगाए गए सेब के पौधों की गुणवत्ता और किस्म का निरीक्षण किया।
बागवानी विभाग आनी के विषयवाद विशेषज्ञ दीप राम ठाकुर ने बताया कि करीब 1170 करोड़ के बजट के सात सालों के इस प्रोजेक्ट के तहत पहले 50 और अब 30 हेक्टेयर भूमि का एक क्लस्टर बनाया गया था। इससे पूरे क्लस्टर में कम से कम एक पानी का स्रोत है। आनी के अंतर्गत ऐसे करीब छह क्लस्टर थे। इनमें इच्छुक बागवानों को गत वर्ष उच्च गुणवत्ता के सेब के 50-50 पौधे दिए थे। ये पौधे प्रति बागवानों को दिए थे। ये पौधे तीन सालों तक दिए जाने हैं। ये पौधे केवल उन्हीं बागवानों को दिए जाएंगे, जिन्होंने विभाग के साथ पंजीकरण करवाया। यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों, बागवानी निदेशालय के अधिकारियों, एनजीओ और प्रदेश के बेहतरीन बागवानों की एक टीम बनाई गई है। दुनिया के सबसे बेहतरीन और गुणवत्ता वाले सेब के पौधे जैसे जीरोमाइन, गेलगाला, रंगम गाला, सुपर चीफ आदि पंजीकृत बागवानों को दिए गए हैं। इसी प्रोजेक्ट के तहत शुक्रवार को करीब 20 लोगों की ऐसी ही टीम ने बारवी और नम्होंग क्लस्टर में पौधों का निरीक्षण किया और बढ़ोतरी के साथ गुणवत्ता का भी जायजा लिया।
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दलाश (कुल्लू)।
प्रदेश में सेब की पैदावार, गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वर्ल्ड बैंक की ओर से प्रायोजित और बागवानी विभाग के प्रोजेक्ट के तहत वर्ल्ड बैंक की टीम ने आनी के बारवी और नम्होंग क्लस्टर का दौरा किया। टीम ने शुक्रवार को प्रोजेक्ट के तहत गत वर्ष बगीचे में लगाए गए सेब के पौधों की गुणवत्ता और किस्म का निरीक्षण किया।
बागवानी विभाग आनी के विषयवाद विशेषज्ञ दीप राम ठाकुर ने बताया कि करीब 1170 करोड़ के बजट के सात सालों के इस प्रोजेक्ट के तहत पहले 50 और अब 30 हेक्टेयर भूमि का एक क्लस्टर बनाया गया था। इससे पूरे क्लस्टर में कम से कम एक पानी का स्रोत है। आनी के अंतर्गत ऐसे करीब छह क्लस्टर थे। इनमें इच्छुक बागवानों को गत वर्ष उच्च गुणवत्ता के सेब के 50-50 पौधे दिए थे। ये पौधे प्रति बागवानों को दिए थे। ये पौधे तीन सालों तक दिए जाने हैं। ये पौधे केवल उन्हीं बागवानों को दिए जाएंगे, जिन्होंने विभाग के साथ पंजीकरण करवाया। यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों, बागवानी निदेशालय के अधिकारियों, एनजीओ और प्रदेश के बेहतरीन बागवानों की एक टीम बनाई गई है। दुनिया के सबसे बेहतरीन और गुणवत्ता वाले सेब के पौधे जैसे जीरोमाइन, गेलगाला, रंगम गाला, सुपर चीफ आदि पंजीकृत बागवानों को दिए गए हैं। इसी प्रोजेक्ट के तहत शुक्रवार को करीब 20 लोगों की ऐसी ही टीम ने बारवी और नम्होंग क्लस्टर में पौधों का निरीक्षण किया और बढ़ोतरी के साथ गुणवत्ता का भी जायजा लिया।
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