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पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नाचे लोग
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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहड़ू। कोटखाई में शवाल का बिशु मेला वीरवार को धूमधाम से संपन्न हो गया। मेले का आयोजन पुजैली दुर्गा माता मंदिर कमेटी के तत्वाधान में हुआ। दो दिनों तक चले इस मेले में आधा दर्जन पंचायत के लोगों ने भाग लिया।
मेले का आरंभ बुधवार को हुआ। माता दुर्गा अपने देवलुओं के साथ शवाल पहुंची। जहां कोटखाई पंचायत, पांदली पंचायत, बाग डुमैहर पंचायत, दरकोटी पंचायत, गरावग पंचायत व थरोला पंचायत के लोगों ने माता का स्वागत किया। मेले में सैकड़ों लोगों ने माता का आशीर्वाद लिया। पारंपरिक शवाल मेला सदियों से मनाया जा रहा है।
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दुर्गा माता पुजैली के भंडारी गोविंद सावंत व मोहन चौहान ने बताया कि शवाल मेले का आयोजन सदियों पहले पटाखर, शकीली, ठारु(घांसी) और शवाल में होता था लेकिन शकीली गांव में स्थानीय लोगों में झगड़ा होने के कारण वर्ष 1944 में ब्रिटिश सरकार ने मेलों पर रोक लगा दी थी। ठारु और शवाल में वर्ष 1945 में मेले से रोक हट गई थी लेकिन पटाखर व शकीली गांव में आज तक मेले पर रोक नहीं हटी है। शवाल का पारंपरिक मेला वर्ष 1945 से नियमित रूप से हर वर्ष हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है।
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मंदिर कमेटी के कारदार रमेश चंद और माता के गूर राजिंद्र शर्मा के अनुसार माता दुर्गा मेले के पहले दिन अपने देवलुओं के साथ शवाल पहुंचती हैं। शाम को माता वापस अपने मंदिर आती है। दूसरे दिन फिर से माता वाद्य यंत्रों के साथ मेले में जाती हैं। इस दौरान माता स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य करती हैं। माता और लोगों का नृत्य मेले का मुख्य आकर्षण रहता है। वीरवार को मेला धूमधाम से संपन्न हो गया।