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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   सेब के बगीचों में माईट का संक्रमण तेजी से शुरू

सेब के बगीचों में माइट का बढ़ा संक्रमण

Fri, 10 May 2019 10:26 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 10 May 2019 10:26 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो

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रोहड़ू। तापमान में बढ़ोतरी के साथ अब सेब के बगीचों में माइट की संक्रमण तेजी से फैल रहा है। गर्मी के दिनों में माइट 24 घंटे तेजी से विकसित होता है। बागवानी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बागवान माइट की जांच के बाद उसकी रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाएं। यदि समय पर माइट को नियंत्रण में नहीं किया गया तो फल और पौधे को भारी नुकसान ही पूरी संभावना रहेगी।

मौजूदा समय में कम व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सेब के बगीचों में माइट का संक्रमण हर दिन बढ़ता जा रहा है। माइट के कीट सेब की पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। अधिकांश बागवानों अभी तक इसके संक्रमण की ओर ध्यान नहीं दे रहे। वहीं कई बागवानों ने बगीचों में माइट की जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इस पर नियंत्रण पाने के लिए दवाइयों का छिड़काव शुरू कर दिया है।
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विशेषज्ञ के अनुसार माइट एक सूक्ष्म मकड़ी होती है जो सेब के पत्तों में नीचे की ओर देखने को मिलती है। सूक्ष्म मकड़ी सेब के पत्तियों से क्लोरोफिल को नष्ट कर देती है। माइट के हमले के बाद सेब के हरे पत्ते धीरे-धीरे सुनहरे रंग में दिखने लगते हैं। उसके बाद समय से पहले बगीचों में पत्तझड़ हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले पत्ते खराब होने पर पौधे को पत्तियों से मिलने वाली खुराक रूक जाती है। उसके बाद फल व पौधे दोनों का विकास थम जाता है। अधिक गर्मी बढ़ने पर सेब के बगीचों में माइट के अंडे 24 घंटे में तेजी से विकसित हो जाते हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ के अनुसार सेब के बगीचों में माइट के संक्रमण की कई जगह से सूचनाएं मिल रही हैं। बागवान तापमान में बढ़ोतरी होने पर हर दिन बगीचे में माइट की जांच करें। यदि एक पत्ते में सात से आठ माइट के नजर आए तो तुरंत इसकी रोकथाम के लिए दवाइयों का छिड़काव करें। समय पर नियंत्रण नहीं हुआ तो बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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