फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   मंदिर के कपाट बंद होने से नहीं हो सकेंगे कोई भी धार्मिक अनुष्ठान

मंदिर के कपाट बंद होने से नहीं हो सकेंगे कोई भी धार्मिक अनुष्ठान

Mon, 14 Jan 2019 10:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jan 2019 10:03 PM IST
विज्ञापन
मंदिरों के कपाट बंद, एक माह नहीं होंगे धार्मिक अनुष्ठान
विज्ञापन

जिले के देवी-देवता मकर संक्रांति के पर्व पर स्वर्ग प्रवास के लिए निकले
फाल्गुन संक्रांति को देवताओं के मंदिरों में लौटने पर मनाया जाएगा पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर/डंसा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर शिमला और कुल्लू जिला के देवी-देवता सोमवार को एक माह के प्रवास पर निकल गए। सभी देवता इंद्र देव की संसद में भाग लेते हैं और इस दौरान साल भर के लिए अच्छे बुरे फलादेशों के संदर्भ में चर्चा करते हैं। देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने के बाद देवालयों के कपाट बंद करवा दिए जाते हैं। मंदिरों में अब एक माह तक कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं हो सकेंगे।
देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास रवाना होने से पहले गूरों के माध्यम से धूप और खिचड़ी परोस कर विधि विधान से पूजा अर्चना कर विदाई करवाई गई। मकर संक्रांति की खासियत है कि प्राचीन समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा को आज के इस आधुनिक युग में भी बराबर निर्वहन हो रहा है। लोहड़ी की रात सुबह तड़के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं विभिन्न पकवान बनाने में व्यस्त रहती हैं। मान्यता है कि कुल्लू के जनपद देवी-देवता एक सप्ताह के अंतराल में देवालयों में प्रवेश करते हैं। वहीं अधिकांश देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास के पश्चात ही फाल्गुन संक्रांति को मंदिरों में लौटते हैं।
विज्ञापन

परशुराम मंदिर कमेटी प्रधान खेलचंद नेगी, महासचिव जेएल डमालू, एसडी कायथ, डीडी शर्मा, श्रवण कुमार, रूप दास और चरण सिंह के अनुसार प्राचीन काल से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने संजोए रखा है। धार्मिक परंपरा के अनुरूप देवताओं को स्वर्ग प्रवास के लिए प्रस्थान करवाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोहड़ी पर्व के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अब एक माह तक पाजा (विशेष पौधे की पत्तियां) सुबह और शाम को लोग अपने घरों में रखते हैं, जिसकी महक से घर काफी खुशनुमा बना रहता है। लोहड़ी पर्व पर ग्रामीण इसे अपने-अपने घर लाते हैं और इसे पर्व के लिए काफी पवित्र माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed