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नए पौधे नहीं लगा पा रहे बागवान
Updated Mon, 22 Jan 2018 10:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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रामपुर बुशहर। लंबे समय से चल रहे सूखे के कारण हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों के बागवान चाहते हुए भी नए फलदार पेड़ नहीं लगा पा रहे हैं। बागवान अपने बगीचों और किसान अपने खेतों का प्रबंधन नहीं कर पा रहा। बागवान और किसान बर्फबारी और बारिश न होने के कारण चिंतित हैं। कुछ और दिनों तक मौसम यूं ही सूखा बना रहा तो आगामी सीजन में फलों और अन्य फसलों की पैदावार पर विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक है। सेब के लिए भले ही जरूरत के अनुसार कड़ाके की ठंड पड़ गई है पर बगीचों में खाद डालने के लिए नमी अभी तक उपयुक्त नहीं है।
जिला शिमला के कोटगढ़, कुमारसैन, रामपुर, जिला कुल्लू के आउटर सिराज और 15/20 क्षेत्र के सेब उत्पादक क्षेत्रों सहित जनजातीय जिला किन्नौर में इन दिनों पड़ रहे सूखे से बागवानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। दिसंबर और जनवरी में बागवानों ने पेड़ों की कटिंग का काम पूरा कर लिया है। बारिश न होने से बागवान खेतों में खाद नहीं डाल पा रहे। कृषि विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि जब तक बारिश और बर्फबारी के बाद उचित मात्रा में नमी नहीं मिलती तब तक बगीचों में खाद न डालें।
अकेले रामपुर और ननखड़ी क्षेत्र में हर साल करीब सेब की करीब पांच लाख पेटियों की पैदावार होती है। इस बार इन क्षेत्रों के बागवान सूखे की मार झेल रहे हैं। दिसंबर और जनवरी में बागवान नए फलदार पौधे लगाते हैं। इस बार दिसंबर-जनवरी में सूखे की स्थिति है और बागवान चाहते हुए भी सेब, नाशपती, बादाम, आड़ू, पलम और चेरी के पेड़ नहीं लगा पा रहे। बागवानों ने बगीचों में फलदार पेड़ों की कटिंग तो कर ली है और साथ ही पेस्टिंग का काम भी पूरा कर लिया है। अब बागवानों को बगीचे में खाद डालनी बाकी है। बारिश और बर्फबारी न होने से बगीचों में नमी न होने के कारण बागवान तौलिये तक नहीं बना पा रहे। खाद डालना भी संभव नहीं है।
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सेब सीजन पर पड़ेगा विपरीत असर
ननखड़ी क्षेत्र के बागवान शमशेर ठाकुर, कुलदीप ठाकुर, प्रदीन, अमन ठाकुर, सुनील कुमार, अमृत लाल, रोहित ठाकुर, सुरेश, प्रीतम और राजेंद्र ठाकुर सहित अन्य बागवानों का कहना है कि पिछले साल अच्छी बर्फबारी होने से फलदार पेड़ों को काफी खुराक मिली थी। सेब के लिए बर्फ वरदान साबित होती है। सूखे ने इस बार बागवानों को झकझोर दिया है। क्षेत्र में बागवान नए पेड़ नहीं लगा पा रहे। ऐसा ही सूखा बना रहा तो आगामी सेब सीजन पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
नए पौधों की मांग नहीं आ रही : एसआर
रामपुर के बागवानी विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ एसआर शर्मा कहते हैं कि बागवानों को नए पेड़ लगाने में परेशानी हो रही है। सूखे के कारण नए पेड़ नहीं लग पा रहे और न ही बगीचों में बागवान खाद डाल पा रहे हैं। सूखे के कारण इस साल अभी तक बागवानों ने नए फलदार पौधों की मांग भी नहीं की है। बारिश और बर्फबारी होने पर बागवानों की मांग आती है। मांग के बाद पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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जिला शिमला के कोटगढ़, कुमारसैन, रामपुर, जिला कुल्लू के आउटर सिराज और 15/20 क्षेत्र के सेब उत्पादक क्षेत्रों सहित जनजातीय जिला किन्नौर में इन दिनों पड़ रहे सूखे से बागवानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। दिसंबर और जनवरी में बागवानों ने पेड़ों की कटिंग का काम पूरा कर लिया है। बारिश न होने से बागवान खेतों में खाद नहीं डाल पा रहे। कृषि विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि जब तक बारिश और बर्फबारी के बाद उचित मात्रा में नमी नहीं मिलती तब तक बगीचों में खाद न डालें।
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अकेले रामपुर और ननखड़ी क्षेत्र में हर साल करीब सेब की करीब पांच लाख पेटियों की पैदावार होती है। इस बार इन क्षेत्रों के बागवान सूखे की मार झेल रहे हैं। दिसंबर और जनवरी में बागवान नए फलदार पौधे लगाते हैं। इस बार दिसंबर-जनवरी में सूखे की स्थिति है और बागवान चाहते हुए भी सेब, नाशपती, बादाम, आड़ू, पलम और चेरी के पेड़ नहीं लगा पा रहे। बागवानों ने बगीचों में फलदार पेड़ों की कटिंग तो कर ली है और साथ ही पेस्टिंग का काम भी पूरा कर लिया है। अब बागवानों को बगीचे में खाद डालनी बाकी है। बारिश और बर्फबारी न होने से बगीचों में नमी न होने के कारण बागवान तौलिये तक नहीं बना पा रहे। खाद डालना भी संभव नहीं है।
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सेब सीजन पर पड़ेगा विपरीत असर
ननखड़ी क्षेत्र के बागवान शमशेर ठाकुर, कुलदीप ठाकुर, प्रदीन, अमन ठाकुर, सुनील कुमार, अमृत लाल, रोहित ठाकुर, सुरेश, प्रीतम और राजेंद्र ठाकुर सहित अन्य बागवानों का कहना है कि पिछले साल अच्छी बर्फबारी होने से फलदार पेड़ों को काफी खुराक मिली थी। सेब के लिए बर्फ वरदान साबित होती है। सूखे ने इस बार बागवानों को झकझोर दिया है। क्षेत्र में बागवान नए पेड़ नहीं लगा पा रहे। ऐसा ही सूखा बना रहा तो आगामी सेब सीजन पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
नए पौधों की मांग नहीं आ रही : एसआर
रामपुर के बागवानी विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ एसआर शर्मा कहते हैं कि बागवानों को नए पेड़ लगाने में परेशानी हो रही है। सूखे के कारण नए पेड़ नहीं लग पा रहे और न ही बगीचों में बागवान खाद डाल पा रहे हैं। सूखे के कारण इस साल अभी तक बागवानों ने नए फलदार पौधों की मांग भी नहीं की है। बारिश और बर्फबारी होने पर बागवानों की मांग आती है। मांग के बाद पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।