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दो साल बाद नेरवा से जयकारे का साथ विदा हुए चालदा महासू देवता
Updated Wed, 28 Nov 2018 10:03 PM IST
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उत्तराखंड रवाना हुए देवता चालदा महासू महाराज
नेरवा में देवता का आशीर्वाद लेने उमड़ा लोगों का हुजूम
कोटि कनासर में एक साल तक प्रवास करेंगे देवता
अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा। जिला शिमला, सिरमौर और उत्तराखंड के जौनसार बाबर के लोगों के देवता चालदा महासू महाराज क्षेत्र में दो साल के प्रवास के बाद उत्तराखंड के कोटि कनासर के लिए रवाना हो गए हैं। अब देवता चालदा महाराज जौनसार बाबर के कंडमाण क्षेत्र के कोटि कनासर में एक साल के प्रवास पर रहेंगे।
उत्तराखंड के महासू स्थित हनोल मंदिर के मुख्य पुजारी चंद राम राजगुरु ने बताया कि प्रदेश में उनका आखिरी प्रवास उत्तराखंड की सीमा पर स्थित भीखटाड गांव में हुआ। चालदा महासू महाराज पहले पड़ाव में देर रात भीखटाड गांव पहुंचे जहां पर हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। नेरवा बाजार में देवता का श्वेत छत्र और पालकी निकलते समय सैकड़ों लोगों ने उनका स्वागत किया। देवता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त के लिए लोगों में खूब होड़ देखने को मिली। लोग नेरवा बाजार में देवता की पालकी पहुंचने से काफी पहले ही कतारों में लग चुके थे। महामाया डुंडी मंदिर तक विदाई यात्रा में हजारों लोग शामिल हो चुके थे।
इससे पूर्व चालदा महाराज एक दिसंबर 2016 से 30 नवंबर 2017 तक न्योल क्षेत्र के जनोग स्थित जनोगेश्वरी माता के मंदिर में प्रवास पर रहे। दूसरे साल दिसंबर 2017 से 23 नवंबर 2018 तक टिक्का साहिब थरोच के प्रांगण में बने मंदिर में रहे। 24 नवंबर को देवता चलदा महाराज थरोच से विदा हो कर पौड़िया पहुंचे। 25 नवंबर को देवता महाराज घुरला व 26 नवंबर को बमटा पंचायत के बडोला में ठाकुर बंधुओं की ओर से आयोजित खड़ी धाम दी गई। उसके बाद अर्ध रात्रि को कंवर निवास नेरवा पधारे। कंवर निवास में पूजा अर्चना के बाद देवता नेरवा से उत्तराखंड की सीमा पर स्थित भीखटाड के लिए रवाना हुए। भीखटाड रवानगी से पूर्व रास्ते में देवता व देवता के साथ आये कारदारों व श्रद्धालुओं ने राणा क्यार में थरोच क्षेत्र के पोटन परिवार द्वारा आयोजित की गई खड़ी धाम ग्रहण की। देवता की इस विदाई यात्रा में देवता के पुजारी, माली, बजंतरी, कारदार और सैंकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। देवता के डोरिया, वाद्य यंत्र, सोने चांदी की रत्नजड़ित पालकी, श्वेत छत्र, चांदी की छाड़ियां और देवता के काफिले के आगे चलने वाले देवता के बकरे इस शोभा विदाई यात्रा के मुख्य आकर्षण रहे।
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नेरवा में देवता का आशीर्वाद लेने उमड़ा लोगों का हुजूम
कोटि कनासर में एक साल तक प्रवास करेंगे देवता
अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा। जिला शिमला, सिरमौर और उत्तराखंड के जौनसार बाबर के लोगों के देवता चालदा महासू महाराज क्षेत्र में दो साल के प्रवास के बाद उत्तराखंड के कोटि कनासर के लिए रवाना हो गए हैं। अब देवता चालदा महाराज जौनसार बाबर के कंडमाण क्षेत्र के कोटि कनासर में एक साल के प्रवास पर रहेंगे।
उत्तराखंड के महासू स्थित हनोल मंदिर के मुख्य पुजारी चंद राम राजगुरु ने बताया कि प्रदेश में उनका आखिरी प्रवास उत्तराखंड की सीमा पर स्थित भीखटाड गांव में हुआ। चालदा महासू महाराज पहले पड़ाव में देर रात भीखटाड गांव पहुंचे जहां पर हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। नेरवा बाजार में देवता का श्वेत छत्र और पालकी निकलते समय सैकड़ों लोगों ने उनका स्वागत किया। देवता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त के लिए लोगों में खूब होड़ देखने को मिली। लोग नेरवा बाजार में देवता की पालकी पहुंचने से काफी पहले ही कतारों में लग चुके थे। महामाया डुंडी मंदिर तक विदाई यात्रा में हजारों लोग शामिल हो चुके थे।
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इससे पूर्व चालदा महाराज एक दिसंबर 2016 से 30 नवंबर 2017 तक न्योल क्षेत्र के जनोग स्थित जनोगेश्वरी माता के मंदिर में प्रवास पर रहे। दूसरे साल दिसंबर 2017 से 23 नवंबर 2018 तक टिक्का साहिब थरोच के प्रांगण में बने मंदिर में रहे। 24 नवंबर को देवता चलदा महाराज थरोच से विदा हो कर पौड़िया पहुंचे। 25 नवंबर को देवता महाराज घुरला व 26 नवंबर को बमटा पंचायत के बडोला में ठाकुर बंधुओं की ओर से आयोजित खड़ी धाम दी गई। उसके बाद अर्ध रात्रि को कंवर निवास नेरवा पधारे। कंवर निवास में पूजा अर्चना के बाद देवता नेरवा से उत्तराखंड की सीमा पर स्थित भीखटाड के लिए रवाना हुए। भीखटाड रवानगी से पूर्व रास्ते में देवता व देवता के साथ आये कारदारों व श्रद्धालुओं ने राणा क्यार में थरोच क्षेत्र के पोटन परिवार द्वारा आयोजित की गई खड़ी धाम ग्रहण की। देवता की इस विदाई यात्रा में देवता के पुजारी, माली, बजंतरी, कारदार और सैंकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। देवता के डोरिया, वाद्य यंत्र, सोने चांदी की रत्नजड़ित पालकी, श्वेत छत्र, चांदी की छाड़ियां और देवता के काफिले के आगे चलने वाले देवता के बकरे इस शोभा विदाई यात्रा के मुख्य आकर्षण रहे।
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