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भाजपा सरकार नौतोड़ बहाल करने में नाकाम: प्रेम कुमार
Updated Thu, 30 Aug 2018 09:16 PM IST
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भाजपा सरकार नौतोड़ बहाल करने में नाकाम : प्रेम कुमार
किन्नौर में भाजपा आपसी वजूद की लड़ाई में उलझी
अमर उजाला ब्यूरो
रिकंागपिओ (किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जनजातीय क्षेत्र के लोगों को नौतोड़ भूमि के रूप में प्राप्त होने वाली भूमि से वंचित रहना पड़ रहा है, जबकि पूर्व कांग्रेस सरकार ने जनजातीय लोगों को नौतोड़ देने के लिए वर्ष 31 दिसंबर 2018 तक एफसीए को हटा दिया था। ऐसे में लोगों के पास समय न के बराबर बचा हुआ है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन बाद से नौतोड़ प्रक्रिया को पूर्ण रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह बात पूर्व जनजातीय सलाहकार परिषद सदस्य प्रेम कुमार नेगी ने रिकांगपिओं में प्रेसवार्ता के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि जिला किन्नौर के तीनों खंडों में करीब दो हजार से अधिक नौतोड़ के मिसल पेंडिंग हैं। ये सभी नौतोड़ मिसलें वन विभाग से स्वीकृत होकर राजस्व विभाग के पास पहुंच गई हैं। हैरतअंगेज यह है इतने नौतोड़ मामलों में से मात्र एक रसूखदार का नौतोड़ पूह एडीएम ने स्वीकृत कर दी। सरकार और प्रशासन ने जिस रसूखदार का नौतोड़ स्वीकृत किया है उससे जाहिर होता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में जनजातीय लोगों को गुमराह कर वोट बटोरने के लिए सरकार ने जनता को गुमराह करने की कोशिश की है। किन्नौर जिले में प्रशासन के ऊपर शासन का कोई नियंत्रण तक नहीं है। किन्नौर की जनता सरकार से भी ऊब चुकी है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जनता से वादा किया था कि भाजपा सरकार सत्ता में आती है तो किन्नौर जिले के अंदर सभी लंबित नौतोड़ मामलों को बहाल कर लोगों को राहत दी जाएगी, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा के नेता जनता से किए वादों को भुलाकर पार्टी के अंदर अपने ही वजूद की लड़ाई में उलझ गए हैं। उन्होंने उपायुक्त किन्नौर से पूछा कि सरकार की ओर से प्रशासन को अगर नौतोड़ पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी हुआ है तो उसे भी सार्वजनिक करे और अगर सरकार नौतोड़ पर प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया है तो नौतोड़ देने के कार्य में तेजी लाई जाए ,अन्यथा किन्नौर कांग्रेस फिर से सरकार और प्रशासन के विरोध में आंदोलन करने से पीछे नही हटेगी।
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किन्नौर में भाजपा आपसी वजूद की लड़ाई में उलझी
अमर उजाला ब्यूरो
रिकंागपिओ (किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जनजातीय क्षेत्र के लोगों को नौतोड़ भूमि के रूप में प्राप्त होने वाली भूमि से वंचित रहना पड़ रहा है, जबकि पूर्व कांग्रेस सरकार ने जनजातीय लोगों को नौतोड़ देने के लिए वर्ष 31 दिसंबर 2018 तक एफसीए को हटा दिया था। ऐसे में लोगों के पास समय न के बराबर बचा हुआ है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन बाद से नौतोड़ प्रक्रिया को पूर्ण रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह बात पूर्व जनजातीय सलाहकार परिषद सदस्य प्रेम कुमार नेगी ने रिकांगपिओं में प्रेसवार्ता के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि जिला किन्नौर के तीनों खंडों में करीब दो हजार से अधिक नौतोड़ के मिसल पेंडिंग हैं। ये सभी नौतोड़ मिसलें वन विभाग से स्वीकृत होकर राजस्व विभाग के पास पहुंच गई हैं। हैरतअंगेज यह है इतने नौतोड़ मामलों में से मात्र एक रसूखदार का नौतोड़ पूह एडीएम ने स्वीकृत कर दी। सरकार और प्रशासन ने जिस रसूखदार का नौतोड़ स्वीकृत किया है उससे जाहिर होता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में जनजातीय लोगों को गुमराह कर वोट बटोरने के लिए सरकार ने जनता को गुमराह करने की कोशिश की है। किन्नौर जिले में प्रशासन के ऊपर शासन का कोई नियंत्रण तक नहीं है। किन्नौर की जनता सरकार से भी ऊब चुकी है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जनता से वादा किया था कि भाजपा सरकार सत्ता में आती है तो किन्नौर जिले के अंदर सभी लंबित नौतोड़ मामलों को बहाल कर लोगों को राहत दी जाएगी, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा के नेता जनता से किए वादों को भुलाकर पार्टी के अंदर अपने ही वजूद की लड़ाई में उलझ गए हैं। उन्होंने उपायुक्त किन्नौर से पूछा कि सरकार की ओर से प्रशासन को अगर नौतोड़ पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी हुआ है तो उसे भी सार्वजनिक करे और अगर सरकार नौतोड़ पर प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया है तो नौतोड़ देने के कार्य में तेजी लाई जाए ,अन्यथा किन्नौर कांग्रेस फिर से सरकार और प्रशासन के विरोध में आंदोलन करने से पीछे नही हटेगी।
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