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रात भर मंदिर में गांव की सलामती की दुआ मांगते रहे लोग
Updated Sat, 16 Jun 2018 07:31 PM IST
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रास्ते में आए पत्थर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भावानगर (किन्नौर)।
किन्नौर जिला के तहत भावानगर के काचरंग गांव में बादल फटने के दूसरे दिन शनिवार को भी लोगों में दहशत का माहौल रहा। उनको यही डर सता रहा था कि कहीं फिर से बादल न फट जाए और नुकसान हो जाए। बादल फटने के बाद कई मकानों में दरारें आ गई हैं। नाले के साथ सटे दस परिवार के मकानों को खतरा बना हुआ है। पानी के साथ-साथ बड़े-बड़े पत्थर गांव में आ गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित दस परिवारों को रक्चार्ड परियोजना के शेडों में शिफ्ट कर दिया है।
बादल फटने से एक दर्जन से अधिक मवेशी चपेट में आने से मर गए हैं। गांव का रास्ता खस्ताहाल हो गया। बादल फटने के धमाके की आवाज सुनते ही लोग नंगे पांव जान बचाने के लिए बाहर की ओर दौड़े और सुरक्षित स्थान की ओर भागे। लोग रात भर मंदिर परिसर में गांव की रक्षा के लिए स्थानीय देवता से दुआ मांगते रहे। बाढ़ से लोगों के मकानों में दरारें और दो गोशालाएं बह गई हैं। सूचना मिलने के बाद शनिवार को भावानगर से प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात करने के बाद नुकसान का आकलन किया। नुकसान की रिपोर्ट जल्द तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। काचरंग नाले के पास 10 परिवार के मकानों को खतरा बना हुआ है। जिन लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा किया गया है, उनमें ईश्वर सिंह, फकीर चंद, ज्ञान सिंह, भगत, श्याम लाल, होशियार सिंह, सुंदर लाल, काऊ राम और देवीनंद शामिल हैं। इसके अलावा भागीरथ और देवलीनंद की गोशाला बह गई हैं, जबकि ईश्वर सिंह, ज्ञान सिंह, काऊराम, सुंदर लाल, श्याम लाल, शिव लाल और बसंत की गोशाला को नुकसान पहुंचा है। ईश्वर सिंह की तीन गाए, एक बछड़ी, ज्ञान सिंह की एक गाय, किरन चंद की दो गाय, काऊराम की दो गाय, गोबिंद की दो गाय, देवकांती की एक गाय और होशियर सिंह की एक गाय बाढ़ में बह गई है। इसके अलावा आईपीएच विभाग के स्टोर टैंक और 250 मीटर पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा है। महिला मंडल, आंगनबाड़ी केंद्र के कमरों में दरारें पड़ी हैं। उधर, एसडीएम भावानगर घनश्याम दास ने कहा कि प्रशासन की टीम मौके पर गई है। नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे जल्द सरकार को भेजा जाएगा।
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किन्नौर जिला के तहत भावानगर के काचरंग गांव में बादल फटने के दूसरे दिन शनिवार को भी लोगों में दहशत का माहौल रहा। उनको यही डर सता रहा था कि कहीं फिर से बादल न फट जाए और नुकसान हो जाए। बादल फटने के बाद कई मकानों में दरारें आ गई हैं। नाले के साथ सटे दस परिवार के मकानों को खतरा बना हुआ है। पानी के साथ-साथ बड़े-बड़े पत्थर गांव में आ गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित दस परिवारों को रक्चार्ड परियोजना के शेडों में शिफ्ट कर दिया है।
बादल फटने से एक दर्जन से अधिक मवेशी चपेट में आने से मर गए हैं। गांव का रास्ता खस्ताहाल हो गया। बादल फटने के धमाके की आवाज सुनते ही लोग नंगे पांव जान बचाने के लिए बाहर की ओर दौड़े और सुरक्षित स्थान की ओर भागे। लोग रात भर मंदिर परिसर में गांव की रक्षा के लिए स्थानीय देवता से दुआ मांगते रहे। बाढ़ से लोगों के मकानों में दरारें और दो गोशालाएं बह गई हैं। सूचना मिलने के बाद शनिवार को भावानगर से प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात करने के बाद नुकसान का आकलन किया। नुकसान की रिपोर्ट जल्द तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। काचरंग नाले के पास 10 परिवार के मकानों को खतरा बना हुआ है। जिन लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा किया गया है, उनमें ईश्वर सिंह, फकीर चंद, ज्ञान सिंह, भगत, श्याम लाल, होशियार सिंह, सुंदर लाल, काऊ राम और देवीनंद शामिल हैं। इसके अलावा भागीरथ और देवलीनंद की गोशाला बह गई हैं, जबकि ईश्वर सिंह, ज्ञान सिंह, काऊराम, सुंदर लाल, श्याम लाल, शिव लाल और बसंत की गोशाला को नुकसान पहुंचा है। ईश्वर सिंह की तीन गाए, एक बछड़ी, ज्ञान सिंह की एक गाय, किरन चंद की दो गाय, काऊराम की दो गाय, गोबिंद की दो गाय, देवकांती की एक गाय और होशियर सिंह की एक गाय बाढ़ में बह गई है। इसके अलावा आईपीएच विभाग के स्टोर टैंक और 250 मीटर पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा है। महिला मंडल, आंगनबाड़ी केंद्र के कमरों में दरारें पड़ी हैं। उधर, एसडीएम भावानगर घनश्याम दास ने कहा कि प्रशासन की टीम मौके पर गई है। नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे जल्द सरकार को भेजा जाएगा।
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