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मांगों की अनदेखी पर कामगारों का प्रदर्शन
Updated Thu, 12 Apr 2018 09:33 PM IST
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रामपुर में अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। पंद्रह सौ मेगावाट के सतलुज जल विद्युत निगम के कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ वीरवार को झाकड़ी पावर हाउस, कोटला और नाथपा में विरोध प्रदर्शन किया। कामगारों ने प्रबंधन को सौंपे गए मांग पत्र पर बातचीत न करने और मांगों को नजरअंदाज करने पर रोष प्रकट किया। इस प्रोजेक्ट में ठेका कामगार पिछले 15-17 सालों से काम कर रहे हैं लेकिन परंतु उन्हें अभी तक कोई प्रोमोशन नहीं दिया गया है और न ही न्यूनतम वेतन के अलावा कोई सालाना इंक्रीमेंट मजदूरों को दी जा रही है। धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रधान राजेश और महासचिव नरेंद्र देष्टा ने कहा कि प्रबंधक वर्ग और ठेकेदारों को यूनियन ने 27 फरवरी 2018 को अपनी मांगों को लेकर 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें यूनियन ने मांग की है कि परियोजना में खाली पडे़ कमरों को कामगारों को दिया जाए और सभी कामगारों के लिए प्रमोशन पॉलिसी बनाई जाए। कामगारों के लिए रेगुलर स्टाफ की तर्ज पर जूते-वर्दी के लिए भत्ता दिया जाए। हर वर्ष कामगारों को वेतन में वार्षिक इंक्रीमेंट लगाई। इसके अलावा रेगुलर स्टाफ की तर्ज पर बसें लगाने की भी मांग की गई, लेकिन प्रबंधक वर्ग ने मांगों पर कोई गौर नहीं किया। यूनियन ने आरोप लगाया है कि कामगारों के अलावा सभी को कमरे दिए जा रहें हैं, जबकि ट्रेनिंग पर आए प्रशिक्षुओं के लिए जो समझौता हुआ है, उसमें कमरे देने का कोई प्रावधान नहीं है। उसके बावजूद परियोजना प्रमुख ने प्रशिक्षुओं को कमरे दिए हैं। ठेका कामगार जो पूरा साल परियोजना के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें कमरे नहीं दिए गए हैं, जो उनके साथ अन्याय है। यूनियन कुुुछ दिन तक सांकेतिक धरना देगी। यदि प्रबंधक वर्ग ने कामगारों की मांगों को नहीं माना तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर रमन शर्मा, अजीत, सुरेंद्र, गुरुदास, चंद, पोविंद्र, अमर, श्यामा, मोहिंद्र कायथ, देश रत्न, भोला राम, रणवीर के अलावा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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रामपुर बुशहर। पंद्रह सौ मेगावाट के सतलुज जल विद्युत निगम के कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ वीरवार को झाकड़ी पावर हाउस, कोटला और नाथपा में विरोध प्रदर्शन किया। कामगारों ने प्रबंधन को सौंपे गए मांग पत्र पर बातचीत न करने और मांगों को नजरअंदाज करने पर रोष प्रकट किया। इस प्रोजेक्ट में ठेका कामगार पिछले 15-17 सालों से काम कर रहे हैं लेकिन परंतु उन्हें अभी तक कोई प्रोमोशन नहीं दिया गया है और न ही न्यूनतम वेतन के अलावा कोई सालाना इंक्रीमेंट मजदूरों को दी जा रही है। धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रधान राजेश और महासचिव नरेंद्र देष्टा ने कहा कि प्रबंधक वर्ग और ठेकेदारों को यूनियन ने 27 फरवरी 2018 को अपनी मांगों को लेकर 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें यूनियन ने मांग की है कि परियोजना में खाली पडे़ कमरों को कामगारों को दिया जाए और सभी कामगारों के लिए प्रमोशन पॉलिसी बनाई जाए। कामगारों के लिए रेगुलर स्टाफ की तर्ज पर जूते-वर्दी के लिए भत्ता दिया जाए। हर वर्ष कामगारों को वेतन में वार्षिक इंक्रीमेंट लगाई। इसके अलावा रेगुलर स्टाफ की तर्ज पर बसें लगाने की भी मांग की गई, लेकिन प्रबंधक वर्ग ने मांगों पर कोई गौर नहीं किया। यूनियन ने आरोप लगाया है कि कामगारों के अलावा सभी को कमरे दिए जा रहें हैं, जबकि ट्रेनिंग पर आए प्रशिक्षुओं के लिए जो समझौता हुआ है, उसमें कमरे देने का कोई प्रावधान नहीं है। उसके बावजूद परियोजना प्रमुख ने प्रशिक्षुओं को कमरे दिए हैं। ठेका कामगार जो पूरा साल परियोजना के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें कमरे नहीं दिए गए हैं, जो उनके साथ अन्याय है। यूनियन कुुुछ दिन तक सांकेतिक धरना देगी। यदि प्रबंधक वर्ग ने कामगारों की मांगों को नहीं माना तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर रमन शर्मा, अजीत, सुरेंद्र, गुरुदास, चंद, पोविंद्र, अमर, श्यामा, मोहिंद्र कायथ, देश रत्न, भोला राम, रणवीर के अलावा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।