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रामदेव के बाद प्रशांत भूषण सरकार के निशाने पर?
शिमला/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2013 12:16 PM IST
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हिमाचल की कांग्रेस सरकार बाबा रामदेव की लीज रद करने के बाद अब अधिवक्ता एवं समाजसेवी प्रशांत भूषण पर भी शिकंजा कस सकती है। प्रशांत भूषण को धूमल सरकार के समय पालमपुर के कंडबाड़ी में 4.68 हेक्टेयर निजी भूमि खरीदने की मंजूरी दी गई थी। यह जमीन कुमुद एजूकेशनल सोसाइटी के नाम है, जिसकी रजिस्ट्री फरवरी 2012 को हुई। राज्य सरकार ने इस सौदे को दो तरह की छूट देकर मंजूरी दी थी।
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राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने पूछा है कि चाय बागान की जमीन प्रशांत भूषण ने कैसे खरीद ली? कौल सिंह ने कहा कि उन्होंने केस लीगल एडवाइज को भेजा है। इसके बाद कैबिनेट इस पर फैसला लेगी। इससे पहले राजस्व मंत्री सदन में यह आश्वासन दे चुके हैं कि वह इस सौदे की जांच करवाएंगे।
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सूत्र कहते हैं कि विधि विभाग ने भी इस सौदे को रद करने के पक्ष में तर्क पेश किए हैं। एडवाइज में वर्ष 2002 के उस केस का हवाला दिया गया है, जिसमें नई दिल्ली से फैज अली नाम के व्यक्ति ने 105 हेक्टेयर टी गार्डन खरीदा था, जिसे बाद में सरकार ने रद कर दिया था।
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राजस्व महकमे के सूत्र कहते हैं कि इस केस में सरकार ने दो तरह से छूट दी थी। पहली धारा 118 के तहत और दूसरी लैंड सीलिंग एक्ट की धारा 5(ए) और 6(ए) के तहत, जिसमें चाय बागान का लैंड यूज बदलने या बेचने का प्रावधान है। अब सरकार को तय करना है कि इस केस में क्या कार्रवाई करनी है?